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कोरोना के कारण 2.14 लाख हेक्टयर क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद होने के कगार पर

Mon, 06 Apr 2020 01:39 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 Apr 2020 01:39 AM IST
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On the verge of ruining wheat crop standing in 2.14 lakh hectare area due to corona
wheat-farm

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लॉकडाउन के बीच खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की कटाई और मड़ाई फंस गई है। आंधी और ओलावृष्टि से सरसो व अन्य तिलहनी, दलहनी फसलों की बर्बादी का सामना कर चुके किसानों की नींद अब अब गेहूं की फसल को लेकर उड़ गई है।



वजह, लॉकडाउन के बीच पड़ोसी राज्यों की सीमाएं सील होने से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के अलावा मिर्जापुर, सोनभद्र से भी मजदूर नहीं आ पा रहे हैं। उधर, मड़ाई करने वाली रिपर, कंबाइन हार्वेस्टर मशीने भी पंजाब से अभी तक नहीं आ सकी हैं। ऐसे में रबी फसलों को खेतों से निकालकर खलिहान और फिर घरों तक लाना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

On the verge of ruining wheat crop standing in 2.14 lakh hectare area due to corona
wheat - फोटो : amar ujala

हालांकि पुलिस की सख्ती के बीच कुछ किसान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर कटाई कर भी रहे हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से घर से मजदूर घरों से निकलने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि यही हाल रहा तो इस बार गेहूं की फसल खेतों में ही बर्बाद हो जाएगी। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में चालू वर्ष 2.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी फसलों की बुवाई की गई है। इसमें 2.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल लगाई गई है।

शेष 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तिलहनी फसलें बोई गई हैं। ऐसे में 21 दिन के लॉकडाउन के पहले से ही खेतों में तैयार फसलों की कटाई बाधित होने से किसानों के सिर पर बल पड़ गए हैं। उनकी चिंता है कि यही हाल रहा तो आंधी और ओलावृष्टि में खेतों में गिरी गेहूं की फसलों के दाने भी खराब हो सकते हैं। धूप तेज होने से गेहूं की बालियों के दाने खेतों में झर जाने की भी आशंका है। ऐसे में अगर मजदूरों के आने जाने और कंबाइन हार्वेस्टर मशानों से मड़ाई कराने की अनुमति नहीं दी गई है, किसानों को बड़ा झटका लगने से इंकार नहीं किया जा सकता।

On the verge of ruining wheat crop standing in 2.14 lakh hectare area due to corona
wheat pila ratwa - फोटो : अमर उजाला

किसानों ने पंजाब से रिपर-कंबाइन हार्वेस्टर लाने की डीएम से अनुमति मांगी

गेहूं की कटाई और मड़ाई के लिए परेशान किसानों ने जिला प्रशासन से गुहार भी लगानी शुरू कर दी है। करछना स्थित खाई गांव के किसान अवधेश शर्मा ने इस मुसीबत की घड़ी में गेहूं की कटाई और मड़ाई के लिए कंबाइन हार्वेस्टर मशीन चलाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है। इसके लिए कंबाइन हार्वेस्टर के चालक के अलावा चार मजदूरों और एक बाइक चालक के लिए अलग से पास जारी करने के लिए आवेदन किया गया है।

इसी तरह शंकरगढ़ के किसान रामकृष्ण पटेल ने पंजाब से रिपर और कंबाइन हार्वेस्स्टर मशीन मंगाने के लिए डीएम से अनुमति जारी करने के लिए पत्र लिखा है, ताकि गेहूं की मड़ाई कराई जा सके। इसकी पुष्टि जिलाकृषि अधिकारी इंद्रजीत यादव ने की। इस बीच कुछ छोटे किसानों ने भी पुलिस की ओर से कटाई, मड़ाई से मना करने की शिकायतें की गई हैं।

गेहूं की कटाई और मड़ाई के लिए जिन किसानों ने रिपर, कंबाइन हार्वेस्टर मशीनें मंगाने के लिए आवेदन किया है, उनके लिए अनुमति दी जा रही है। साथ ही उपजिलाधिकारियों और थानों को भी इस संबंध में अवगत करा दिया गया है कि किसी भी किसान को गेहूं की कटाई और मड़ाई से न रोका जाए। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए गेहूं की कटाई, मड़ाई कराई जा सकती है। इंद्रजीत यादव, जिला कृषि अधिकारी।

कोट
यह महीना कटाई और मडाई का है। गेंहू के अलावा अलसी, चना की फसलें पूरी तरह पक कर तैयार हो गई हैं। मसूर, मटर और सरसो की कटाई 15 दिन पहले हो जानी चाहिए थी। अब इनके दाने झरने लगे हैं। अगर कटाई में अब विलंब हुआ तो बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में मजदूरों को सावधानी के साथ निकलने दिया जाना चाहिए। मुनीश कुमार सिंह, वरीय कृषि अनुसंधान सहायक- शुआट्स। 
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