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कुंभ स्नान के लिए आ रहे हैं प्रयागराज तो दो दिन का ट्रिप करें प्लान, इन 8 जगहों पर जरूर घूमे
Sat, 19 Jan 2019 12:07 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 19 Jan 2019 12:07 PM IST
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प्रयागराज में कुंभ आरंभ हो चुका है, ऐसे में लोग देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में यहां गंगा स्नान करने आ रहे हैं। अब अगर आपका भी कुंभ स्नान का प्लान बन रहा है तो बस 2 दिन में इन खास स्थानों पर जानें से आपकी ट्रिप यादगार बन सकती है। हम आपको बताते है कि संगम स्नान के बाद आप किन स्थानों पर आसानी से जा सकते हैं। आगे की स्लाइड्स पढ़ें...
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लेटे हुए हनुमान जी
प्रयागराज क्षेत्र के संगम तट पर स्थित प्राचीन हनुमान जी का मन्दिर है। यह मन्दिर धरती का एकमात्र मन्दिर है जिसका विवरण पुराणों में भी मिलता है। पूरी पृथ्वी पर यही एकमात्र मन्दिर है जिसमें हनुमान जी के लेटे हुए रुप का विवरण है। हर वर्ष गंगा मैया खुद उन्हें स्नान कराती हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में सभी मन्नतें पूरी होती हैं। कथा है कि औरंगजेब और उसकी भीषण सेना ने हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की खूब कोशिश की लेकिन वह टस से मस न कर सके। सैनिक गंभीर रूप से बीमार हो गए और हारकर उन्हें वहां से लौटना पड़ा।
प्रयागराज क्षेत्र के संगम तट पर स्थित प्राचीन हनुमान जी का मन्दिर है। यह मन्दिर धरती का एकमात्र मन्दिर है जिसका विवरण पुराणों में भी मिलता है। पूरी पृथ्वी पर यही एकमात्र मन्दिर है जिसमें हनुमान जी के लेटे हुए रुप का विवरण है। हर वर्ष गंगा मैया खुद उन्हें स्नान कराती हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में सभी मन्नतें पूरी होती हैं। कथा है कि औरंगजेब और उसकी भीषण सेना ने हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की खूब कोशिश की लेकिन वह टस से मस न कर सके। सैनिक गंभीर रूप से बीमार हो गए और हारकर उन्हें वहां से लौटना पड़ा।
अक्षयवट के दर्शन करते हुए सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला
अक्षयवट
अकबर के किले में प्रसिद्ध अक्षयवट वृक्ष भी मौजूद है। मान्यता यह है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम की वजह से ही इस अक्षय वट की उत्पत्ति हुई है। इसके दर्शन के बाद ही संगम पर स्नान करने वालों के सभी कामना पूरी होती है। यह बरगद का वृक्ष बहुत प्राचीन है। वैसे तो पूरा किला क्षेत्र सेना के अधिकार में रहता है और यहां आम लोगों का जाना प्रतिबंध रहता है लेकिन कुंभ मेले को देखते हुए सरकार ने इसे आम लोगों के लिए 450 वर्षों बाद खोला है।
अकबर के किले में प्रसिद्ध अक्षयवट वृक्ष भी मौजूद है। मान्यता यह है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम की वजह से ही इस अक्षय वट की उत्पत्ति हुई है। इसके दर्शन के बाद ही संगम पर स्नान करने वालों के सभी कामना पूरी होती है। यह बरगद का वृक्ष बहुत प्राचीन है। वैसे तो पूरा किला क्षेत्र सेना के अधिकार में रहता है और यहां आम लोगों का जाना प्रतिबंध रहता है लेकिन कुंभ मेले को देखते हुए सरकार ने इसे आम लोगों के लिए 450 वर्षों बाद खोला है।
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सरस्वती प्रतिमा का पूजन करते सीएम योगी
- फोटो : ANI
सरस्वती कूप
सरस्वती कूप किला क्षेत्र के अंदर ही स्थित है इसके बारे में मान्यता यह है कि जब मां सरस्वती धरती में समा गयी थी तब भगवान बेणी माधव ने सरस्वती जी पूजा अर्चना किये थे खुश होकर मां सरस्वती इसी कूप से प्रकट हुई थीं। फिलहाल सरस्वती कूप पर सरकार शोध करने जा रही है।
सरस्वती कूप किला क्षेत्र के अंदर ही स्थित है इसके बारे में मान्यता यह है कि जब मां सरस्वती धरती में समा गयी थी तब भगवान बेणी माधव ने सरस्वती जी पूजा अर्चना किये थे खुश होकर मां सरस्वती इसी कूप से प्रकट हुई थीं। फिलहाल सरस्वती कूप पर सरकार शोध करने जा रही है।
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मनकामेश्वर मन्दिर
किला के पश्चिमी यमुना तट पर मिन्टो पार्क के निकट यह मंदिर स्थित है। यहां काले पत्थरों से बनी भगवान शिव का एक लिंग और गणेश एवं नंदी की मूर्तियां भी हैं। यहां हनुमान जी की भी एक बड़ी मूर्ति है और मंदिर के निकट एक प्राचीन पीपल का पेड़ है जिसकी लोग पूजा-अर्चना करते हैं।
किला के पश्चिमी यमुना तट पर मिन्टो पार्क के निकट यह मंदिर स्थित है। यहां काले पत्थरों से बनी भगवान शिव का एक लिंग और गणेश एवं नंदी की मूर्तियां भी हैं। यहां हनुमान जी की भी एक बड़ी मूर्ति है और मंदिर के निकट एक प्राचीन पीपल का पेड़ है जिसकी लोग पूजा-अर्चना करते हैं।