महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत मामले में दर्ज एफआईआर में भी आनंद गिरि पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। मुकदमा वादी व मठ के पुजारी अमर गिरि पवन महाराज की ओर से जार्जटाउन थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महंत स्वयं कहा करते थे कि आनंद गिरि उन्हें बहुत परेशान करता रहता है। तहरीर में कहा गया है कि, 20 सितंबर को 12.30 बजे महंत मठ के कक्ष में भोजन करने के बाद रोज की तरह विश्राम करने चले गए। रोज दोपहर तीन बजे उनका चाय पीने का समय होता था लेकिन उस दिन उन्होंने पहले ही मना कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि चाय पीना होगा तो वह स्वयं बता देंगे। शाम पांच बजे तक कक्ष से बाहर नहीं आने पर उनके पास फोन किया गया, लेकिन नंबर बंद मिला। आगे पढ़िए फिर क्या हुआ और आखिर क्यों एफआईआर में आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम नहीं है...
नरेंद्र गिरि: मौत वाले दिन महंत ने दोपहर की चाय से कर दिया था इनकार, जब शाम तक भी नहीं आए तो...
दरवाजा खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इस पर शिष्य सुमित तिवारी, सर्वेश कुमार द्विवेदी और धनंजय आदि ने धक्का देकर दरवाजा खोला तो महंत पंखे में फंसाए गए फंदे पर लटके मिले। जीवन की संभावना को देखते हुए शिष्यों ने रस्सी काटकर शव को नीचे उतारा लेकिन तब तक उनका निधन हो चुका था। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महंत पिछले कुछ महीनों से आनंद गिरि को लेकर परेशान रहा करते थे। यह बात वह कभी-कभी खुद कहा करते थे कि आनंद गिरि उन्हें परेशान करता रहता है।
दी गई सूचना, किस बात की यह स्पष्ट नहीं
वादी की ओर से दी गई तहरीर में सबसे अंत में लिखा है कि यह सूचना उनकी ओर से थाना जार्जटाउन व आईजी प्रयागराज को दी गई। हालांकि तहरीर पढ़ने से यह स्पष्ट नहीं है कि यहां किस सूचना के संबंध में बात हो रही है। दरअसल इस लाइन से ठीक पहले महंत को आनंद गिरि की ओर से परेशान करने की बात लिखी है। जबकि इससे पहले घटना का जिक्र यानी महंत के फंदे पर लटके मिलने की बात लिखी है। अब सवाल यह है कि सूचना देने का संबंध आनंद गिरि की ओर से महंत को परेशान करने से था या फिर यहां घटना की सूचना की बात हो रही है।
तीन किमी दूरी, आठ घंटे बाद दर्ज हुई एफआईआर
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि घटना की एफआईआर करीब आठ घंटे बाद दर्ज हुई। जबकि घटनास्थल जार्जटाउन थाने से बमुश्किल तीन किमी की दूरी पर है। तहरीर के मुताबिक, वादी मुकदमा व अन्य शिष्यों को घटना की जानकारी शाम पांच बजे के करीब हुई। जबकि मामले की एफआईआर रात लगभग एक बजे लिखी गई। एफआईआर दर्ज करने का वास्तविक समय 12.54 मिनट दर्शाया गया है।
पुजारी व उसके बेटे का नाम न होने पर उठे सवाल
तहरीर में बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उसके बेटे संदीप का नाम न होने पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। दरअसल महंत का कथित सुसाइड नोट मौके से ही बरामद कर लिया गया था। इसके बाद यह भी बात सामने आ ही गई थी कि महंत के कथित सुसाइड नोट में पुजारी व उसके बेटे का भी नाम है। इसके बावजूद आठ घंटे बाद भी जब रिपोर्ट थाने में दी गई तो उसमें दोनों का नाम क्यों नहीं शामिल किया गया।