नरेंद्र गिरि: बाघंबरी गद्दी मठ की अकूत धन-संपदा तो नहीं बनी महंत के मौत की वजह, पहले भी दो महंतों की हो चुकी है संदिग्ध मौत
महंत नरेंद्र गिरि ने यह भी तर्क दिया था कि उस जमीन पर मार्केट बसा दिया जाएगा तो मठ की आमदनी बढ़ेगी। जबकि आनंद गिरि का कहना था कि गुरुजी ने उस जमीन को बेचने के लिए लीज निरस्त कराई थी। बाघंबरी मठ की करोड़ों रुपये की इस जमीन को लेकर गुरु-शिष्य के बीच घमासान इस कदर मचा कि निरंजनी अखाड़े और बाघंबरी मठ से आनंद गिरि को निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद आनंद गिरि ने भागकर हरिद्वार में शरण ली।
इतना ही नहीं, हरिद्वार में आनंद गिरि की ओर से बनवाए जा रहे आश्रम को भी वहां सील करवा दिया गया। उनके सुरक्षा गार्ड वापस ले लिए गए थे। इससे पहले भी 40 करोड़ रुपये की बाघबंरी गद्दी मठ की सात बीघे भूमि बेचे जाने को लेकर हुए विवाद को लेकर वहां राइफलें तन चुकी हैं। इतना ही नहीं मांडा और राय बरेली में भी निरंजनी अखाड़े की करोड़ों की भूमि बेचे जाने को लेकर विवाद रहा है।
पहली बार 2005 में बाघंबरी गद्दी मठ से जुड़े आनंद गिरि
योग गुरु आनंद गिरि पहली बार वर्ष 2005 में बागंबरी गद्दी मठ से जोड़े गए। वर्ष 2000 में आनंद ने महंत नरेंद्र गिरि को अपना गुरु स्वीकार किया था। हरिद्वार स्थित निरंजनी अखाड़े में 2003 में आनंद गिरि को पहली बार थानापति बनाकर के बड़ोदरा अखाड़े के मंदिर में जिम्मेदारी दी गई। 2004 नरेंद्र गिरि मठ बाघंबरी गद्दी के महंत बने।