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नरेंद्र गिरि: बाघंबरी गद्दी मठ की अकूत धन-संपदा तो नहीं बनी महंत के मौत की वजह, पहले भी दो महंतों की हो चुकी है संदिग्ध मौत

Tue, 21 Sep 2021 03:26 AM IST
पूजा त्रिपाठी अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 21 Sep 2021 03:26 AM IST
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mahant Narendra giri death people suspect niranjani akhada huge property dispute behind saint death earlier two saints also died suspected
narendra giri - फोटो : अमर उजाला
बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है। मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीनें बेचने, सेवादारों और उनके परिवारीजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है। ऐसे ही विवादों को लेकर निरंजनी अखाड़े के मठ में दो महंतों की संदिग्ध मौतें पहले भी हो चुकी हैं। अब नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर भी संपत्ति विवाद की गहरी जड़ें हर किसी का ध्यान खींच रही हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि से उनके शिष्य योग गुरु आनंद गिरि के बीच विवाद बीते मई महीने में बाघंबरी गद्दी मठ की 80 फीट चौड़ी और 120 फीट लंबी गोशाला की भूमि की लीज निरस्त कराए जाने के बाद सामने आया। आनंद गिरि के नाम लीज पर दी गई इस जमीन पर पेट्रोल पंप प्रस्तावित किया गया। कुछ दिन बाद ही महंत नरेंद्र गिरि ने यह कहते हुए लीज निरस्त करा दी कि वहां पेट्रोल पंप नहीं चल सकता।
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narendra giri - फोटो : अमर उजाला

महंत नरेंद्र गिरि ने यह भी तर्क दिया था कि उस जमीन पर मार्केट बसा दिया जाएगा तो मठ की आमदनी बढ़ेगी। जबकि आनंद गिरि का कहना था कि गुरुजी ने उस जमीन को बेचने के लिए लीज निरस्त कराई थी। बाघंबरी मठ की करोड़ों रुपये की इस जमीन को लेकर गुरु-शिष्य के बीच घमासान इस कदर मचा कि निरंजनी अखाड़े और बाघंबरी मठ से आनंद गिरि को निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद आनंद गिरि ने भागकर हरिद्वार में शरण ली।

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narendra giri - फोटो : अमर उजाला

इतना ही नहीं, हरिद्वार में आनंद गिरि की ओर से बनवाए जा रहे आश्रम को भी वहां सील करवा दिया गया। उनके सुरक्षा गार्ड वापस ले लिए गए थे। इससे पहले भी 40 करोड़ रुपये की बाघबंरी गद्दी मठ की सात बीघे भूमि बेचे जाने को लेकर हुए विवाद को लेकर वहां राइफलें तन चुकी हैं। इतना ही नहीं मांडा और राय बरेली में भी निरंजनी अखाड़े की करोड़ों की भूमि बेचे जाने को लेकर विवाद रहा है।

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कुंभ के दौरान अमित शाह के साथ स्नान करते महंत नरेंद्र गिरि - फोटो : अमर उजाला

पहली बार 2005 में बाघंबरी गद्दी मठ से जुड़े आनंद गिरि
योग गुरु आनंद गिरि पहली बार वर्ष 2005 में बागंबरी गद्दी मठ से जोड़े गए। वर्ष 2000 में आनंद ने महंत नरेंद्र गिरि को अपना गुरु स्वीकार किया था। हरिद्वार स्थित निरंजनी अखाड़े में 2003 में आनंद गिरि को पहली बार थानापति बनाकर के बड़ोदरा अखाड़े के मंदिर में जिम्मेदारी दी गई। 2004 नरेंद्र गिरि मठ बाघंबरी गद्दी के महंत बने।

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narendra giri - फोटो : अमर उजाला
आनंद गिरि का कहना है कि महंत बनने के बाद सबसे पहले गुरुजी ने मठ के विद्यालय की एक जमीन बेची थी। जिसे लेकर अखाड़ा उनके विरोध में खड़ा हो गया था। आनंद का कहना है कि तब उन्होंने फोन करके उनको बड़ोदरा से बुलाया बाघंबरी मठ बुलाया था।
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