अधिवक्ता कल्याण की योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालने से नाराज प्रदेश भर के वकीलों ने आरपार की लड़ाई का एलान किया है। शनिवार को बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के प्रांगण में जुटे प्रदेश भर के अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में इसकी घोषणा की। उन्होंने वकीलों की उपेक्षा पर न सिर्फ प्रदेश सरकार को कोसा बल्कि अपना हक हासिल करने के लिए सड़क से विधानसभा तक लड़ाई की घोषणा भी की। अधिवक्ता दो मार्च से आंदोलन आरंभ करेंगे और विभिन्न चरणों से होते हुए 15 अप्रैल को विधानसभा का घेराव करेंगे।
वकीलों ने प्रयागराज से किया आरपार की लड़ाई का एलान
मौजूदा हालात पर विचार करने के लिए बार कौंसिल की ओर से आयोजित प्रदेशस्तरीय सम्मेलन में जुटे प्रदेश के सभी जिलों के अधिवक्ता संगठनों के अतिरिक्त तहसीलों, अधिकरणों आदि के संघों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि चैंबर निर्माण, मृतक अधिवक्ताओं के आश्रितों को आर्थिक सहायता, पेंशन और स्टाइपेंड जैसी योजनाओं को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। न्यासी समिति को दी जाने वाली 40 करोड़ रुपये वार्षिक की आर्थिक सहायता कई वर्षों से नहीं दी जा रही है। पूरे प्रदेश में मृतक अधिवक्ताओं के तकरीबन करीब 500 मामले लंबित हैं। अधिवक्ताओं को 60 वर्ष की आयु में मृत्यु पर आर्थिक सहायता का प्रावधान था, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 70 वर्ष कर दिया है।
बार कौंसिल की ओर से सरकार से प्रतिवर्ष 80 करोड़ रुपये न्यासी समिति को देने की मांग की गई ताकि संचालित योजनाओं को पूरा किया जा सके। धनराशि न मिलने से अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं फेल होने के कगार पर हैं। कौंसिल ने तय किया कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो आंदोलन आरंभ किया जाएगा। कौंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने अध्यक्षता और उपाध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा ने संचालन किया।
सम्मेलन में सदस्य बलवंत सिंह, योगेंद्र स्वरुप, अब्दुल रज्जाक खां, रोहिताश्व अग्रवाल, इमरान माबूद खां, पांचू राम मौर्य, अरुण कुमार त्रिपाठी, अजय कुमार शुक्ल, अजय यादव, अखिलेश कुमार अवस्थी, प्रशांत सिंह अटल, श्रीकुमार मेहरोत्रा, को चेयरमैन जानकीशरण पांडेय, जय नारायण पांडेय, प्रदीप कुमार सिंह, अंकज मिश्र, मधुसूदन त्रिपाठी और राकेश पाठक के अतिरिक्त प्रदेश के लगभग सभी अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
1- दो मार्च 2020 - सभी बार एसोसिएशन न्यायिक कार्य से विरत रहेंगी, संगठनों के अध्यक्ष और मंत्री अपने-अपने जिलों में ज्ञापन सौपेंगे।
2- 16 मार्च 2020- प्रदेश भर के अधिवक्ता (आयकर, जीएसटी, रेवेन्यू और कैट सहित) हाथ में लाल पट्टी बांधकर काम करेंगे। न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
3- 23 मार्च 2020- सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन होगा।
4- 30 मार्च 2020- सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर न्यायिक कार्य से विरत रहते प्रदेश सरकार का पुतला जलाया जाएगा।
5- 15 अप्रैल 2020- अधिवक्ता पूरे ड्रेस में विधानसभा का घेराव करेंगे।
कौंसिल के परिचय पत्र को ही मिले मान्यता
सम्मेलन के दौरान वकीलों को बार कौंसिल की ओर से जारी परिचयपत्र और सीओपी (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) को ही उनके परिचयपत्र के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग की गई। जिला न्यायालयों में प्रवेश के लिए अलग से परिचय पत्र बनाने की व्यवस्था से कौंसिल सहमत नहीं है। उनके परिचयपत्र को मान्यता न देने की स्थिति में अग्रिम कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
टीन शेड और छप्पर का ही है सहारा
बार कौंसिल के महासम्मेलन में शामिल होने आए प्रदेश भर के अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपना दर्द बयां किया। संगठनों की आम शिकायत थी कि वे बेहद विपरीत परिस्थितियों में रहकर काम कर रहे हैं और सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। अधिकतर जिलों और तहसीलों में आज भी वकीलों के बैठने और काम करने का इंतजाम नहीं है। वकील टीन शेड और फूस के छप्पर या कई जगहों पर पेड़ों के नीचे बैठकर काम करते हैं। गर्मी, सर्दी और बरसात हर मौसम में परिस्थितियां प्रतिकूल ही होती हैं। वकीलों की फाइलों के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। वकीलों के चैंबर के लिए अब तक जितने भी इंतजाम हुए हैं, नाकाफी हैं।
अध्यक्ष की कार्यशैली पर उठाए सवाल
महासम्मेलन में आए अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने बार कौंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि अध्यक्ष अनावश्यक रूप से अधिवक्ता संघों के कार्यों में दखल देते हैं। उन्नाव बार एसोसिएशन के महासचिव बृजेंद्र मोहन बाजपेयी ने दो टूक कहा कि एक सदस्य के खिलाफ की गई कार्रवाई को अध्यक्ष ने एकतरफा निर्णय लेकर समाप्त कर दिया। इलाहाबाद जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हरिसागर मिश्र ने भी अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इसी प्रकार सम्मेलन के दौरान अन्य संगठनों ने भी उनकी शिकायत की।