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Kumbh Mela 2019: बसंत पंचमी कुम्भ का तीसरा शाही स्नान पर्व, 3 डुबकी दिलाएगी पूर्ण कुम्भ का पुण्य

Wed, 06 Feb 2019 10:53 PM IST
shubham ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय, प्रयागराज
ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय, प्रयागराज Published by: shubham Updated Wed, 06 Feb 2019 10:53 PM IST
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Third Shahi Snan festival on Basant Panchami, know importance
dusra Shahi Snan

कुम्भ के प्रमुख स्नान पर्वों में बसंत पंचमी तीसरा शाही स्नान पर्व अपने आप में विशेष महत्वपूर्ण है। संगम के अक्षय क्षेत्र पर बसंत पंचमी कीे दिन स्नान, ध्यान, जप, तप, पूजा, पाठ, दान, पुण्य का विशेष महत्व बता रहे हैं, ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय।



(सभी तस्वीरें:- अनिरूद्ध पांडे)

Third Shahi Snan festival on Basant Panchami, know importance
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धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रयाग में सरस्वती अदृश्य रूप से विद्यमान हैं, यहां स्नान करने से सरस्वती के जितने जलकण स्नान के समय शरीर को स्पर्श करते हैं उतने ही समय तक मनुष्य स्वर्ग में वास करता है। सरस्वती पुण्य प्रदायनी, पुण्य की जननी तथा पवित्र तीर्थ स्वरूपा है। पाप रूपी अज्ञान की लकड़ी को जलाने के लिए यह अग्निस्वरूपा है।

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अतएव वसंत पंचमी को सरस्वती के दिन स्नान-दान और पूजन करने से पापों का क्षय और अविद्या का नाश होता है, बुद्धिबल का विकास होता है। ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय के अनुसार शाही स्नान पर तीन डुबकी लगाने से पूर्ण कुम्भ का पुण्य प्राप्त होता है।

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यद्यपि प्रयाग में सरस्वती अदृश्य है परंतु इसके अस्तित्व से इंकार नहीं किया जा सकता। गंगा और यमुना के साथ सरस्वती का नाम जुड़ने से ही त्रिवेणी का योग बनता है। वस्तुतः सरस्वती में स्नान करने का महान पुण्य है जो श्रद्धालु सरस्वती में स्नान करते हैं उनका पुनर्जन्म नहीं होता अर्थात् मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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मान्यता है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या के बाद तीसरे शाही स्नान बसंत पंचमी पर भी त्रिवेणी स्नान करता है, उसे पूर्ण कुम्भ का फल मिलता है। बसंत पंचमी के पर्व पर ब्रह्म मुहूर्त में 10 बजकर 09 मिनट तक विशेष मुहूर्त में गणपति तथा विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन कर त्रिवेणी संगम में विद्यमान अदृश्य सरस्वती, गंगा एवं यमुना जी सहित तीर्थराज प्रयाग का स्मरण कर डुबकी लगाने वाला व्यक्ति महापुण्य का भागी बनता है।

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