कुंभ मेले की सफाई इस बार सबके मन को भा रही है। न गंदगी, न कूड़ा, हर तरफ चकाचक माहौल, स्वास्थ्य विभाग को कमिश्नर ने सौ में सौ नंबर दिए हैं। करीब 18 हजार कर्मचारियोंं, स्वेच्छाग्राहियों की फौज दो शिफ्टों में सफाई कार्य में लगी है। हाईटेक व्यवस्था के तहत आईसीटी एप से कर्मचारियों की मॉनिटरिंग ट्रेस होती है। सही मायने में स्वास्थ्य विभाग के ये सफाई कर्मचारी कुंभ के हीरो बने हैं।
कुंभ को मच्छर-मख्खी विहीन बनाने के साथ साफ रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने फूल प्रूफ प्लान बनाया। सैनीटेशन के इस काम में लगाए गए कुल कर्मचारियों में 8000 दिहाड़ी कर्मचारी हैं तो 8000 से अधिक शौचालय स्थापित करने वाले वेंडरों के हैं। निगरानी के लिए अफसरों के साथ जिले भर के 1500 स्वेच्छाग्राही लगाए गए हैं।
तीन स्नान पर्वों पर घाटों पर होने वाली गंदगी मिनटों में साफ कर हटाई गई। 10 शौचालयों पर सफाई के लिए लगाए गए एक कर्मचारी की रणनीति कारगर रही। 14 पुराने लोग प्रशिक्षित सफाई कर्मियों को लेकर मेला में आए हैं। इनमें 35 साल से मेला करा रहे बांदा के रहने वाले शिवलाल और मोहन लाल बताते हैं कि पहली बार ऐसा हुआ है कि समय से भुगतान हो रहा है, ऐसे में काम भी दुरुस्त हो रहा है।
स्वेच्छाग्राही बहादुरपुर ब्लाक के श्याम बिंद और बहरिया की नम्रता बताती हैं कि लोगों को जागरूक करने के साथ निगरानी करना उनका काम है, जिसकी सार्थकता दिख रही है। उन्होंने बताया कि रात दो से सुबह दस बजे तक फिर दिन में दो बजे से रात दस बजे की शिफ्ट में काम कराया जा रहा है।
क्यूआर कोड से होती निगहबानी
कुंभ में सफाई की हाईटेक व्यवस्था के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम में हर घंटे की सूचना आती है। निरीक्षण की रिपोर्ट पर कहां गंदगी है, कहां शौचालय की सफाई नहीं हुई है, कितने शौचालय दुर्गंध फैला रहे हैं, कहां बल्ब नहीं हैं आदि की सूचना संबंधित सुपरवाइजर के मोबाइल पर पहुंच जाती है। क्यूआर कोड से निगहबानी होने की वजह से ओके रिपोर्ट भी नियत समय पर देनी पड़ती है। शायद इसीलिए मेले में इस बार सफाई चकाचक है। इसकी मॉनीटरिंग विभाग की सलाहकार सलोनी गोयल कर रही हैं।