मौनी अमावस्या पर रविवार को ही एक करोड़ से ज्यादा लोग मेले में आ गए थे। यह सिलसिला सोमवार तक चलता रहा। सुबह 11 बजे के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ मेले के बाहर बढऩे लगी तो पुलिस का ट्रैफिक प्लान पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। आनन फानन में स्टेशनों, बस अड्डों तक पहुंचे के रास्तों पर बेरीकेडिंग कर सबको रोक दिया गया या डायवर्ट कर दिया। सिर पर गठरी लिए श्रद्धालुओं का रेला उधर ही मुड़ जाता जिधर उन्हें मोड़ा जाता। लाखों की संख्या में लोगों ने पैदल ही शास्त्री पुल, फाफामऊ पुल, नए यमुना पुल और पुराने पुल से बाहर गए। शटल बस तथा अन्य बसों से श्रद्धालुओंं को बाहर भेजने की व्यवस्था भीड़ की वजह से चरमरा गई थी।
कुंभ 2019: जहां मोड़ा उधर मुड़ चला भीड़ का रेला, तस्वीरों में देखें आस्था का महासमुद्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेला और जिला पुलिस के समन्वय में क्राउड कंट्रोल और ट्रैफिक के कई वैकल्पिक प्लान बनाए गए थे। सुबह 11 बजे तक सब ठीक चल रहा था। इसके बाद यकायक मेले से भीड़ का रेला निकलकर स्टेशनों और बस अड्डों की ओर बढऩे लगा। कुछ ही देर में पूरा जंक्शन, सिटी स्टेशन और प्रयाग रेलवे स्टेशन पूरी तरह से फुल हो गया। सड़कों की भीड़ लगातार स्टेशन के पास पहुंच रही थी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने तुरंत निर्णय लिया कि भीड़ का प्रवेश स्टेशनों पर रोक दिया जाय। इसके बाद तो हालात बेकाबू होने लगे। बाहर भीड़ बढऩे लगी तो आस पास सड़कों पर ही बैठने लगे।
कुछ देर बाद स्टेशनोंं तक जाने वाली रोड को पैदल श्रद्धालुओं के लिए भी बंद कर दिया गया। अब भीड़ को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाने लगा। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने कोशिश की कि ज्यादा से ज्यादा लोगोंं को पुलों के माध्यम से शहर से बाहर भेजा जाय। सिरों पर गठरी लादें बच्चोंं को साथ लिए भीड़ बेहाल होकर जिधर पुलिस वाले कहते, उधर मुड़ जाती। दिन भर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओंं को पैदल ही पुल पार कर दिया गया।
उधर शहर में वाहन लगभग पूरी तरह से बंद कर दिए गए थे। जगह जगह बेरीकेडिंग और टीन लगाकर दो पहिया वाहनों को भी रोक दिया गया था। सुबह से शाम तक यह स्थिति बनी रही। न भीड़ का रेला कम हो रहा था न ही पुलिस वालों का डायवर्जन प्लान। लाखोंं की संख्या मेंं लोग देर रात तक जंक्शन और प्रयाग स्टेशन के सामने बैठे रहे। रामबाग स्टेशन के पास तो लोगों को बैठने भी नहीं दिया गया। वहां से जीआईसी होते ही लोगों को सिविल लाइंस की तरफ डायवर्ट कर दिया गया था।
लाखों की संख्या मेंं श्रद्धालुओं को जब इधर उधर डायवर्ट किया जाने लगा तो वे भूख प्यास से बेहाल होने लगे, खासकर बच्चे। लेकिन शहर में जगह जगह चले रहे भंडारों ने श्रद्धालुओं की भूख प्यास को शांत किया लेकिन लाखों की संख्या में लोगों के लिए सड़क पर पानी तक नहींं था। मेले में तो जगह जगह पानी मिल जा रहा था लेकिन शहर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।