इस बार 15 जनवरी से 4 मार्च तक संगमनगरी में कुंभ मेला लगने जा रहा है। संगम की रेती पर संतो-महंतों ने आकर धुनी रमा दी है। अखाड़ों की रोज पेशवाई हो रही है। सरकार भी दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ के संकल्पना को साकार करने में पूरी तरह जुटी हुई है। कहा जा रहा है कि इस बार कुंभ अद्भुत संयोग लेकर आया है। आगे की स्लाइड में पढ़ें क्या है ये संयोग...
ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के मुताबिक, ज्योतिष शास्त्र की गणनाएं नौ ग्रहों और बारह राशियों पर आधारित हैं। कुम्भ की अलौकिक घटना ग्रहराज सूर्य, ग्रहरानी चन्द्रमा, देवगुरु बृहस्पति और न्यायदाता शनि के योगदान का प्रतिफल है।
सूर्य ने कुम्भ कलश को फूटने से बचाया था, चंद्रमा ने अमृत को कुम्भ कलश से गिरने से रोका, गुरु ने असुरों से कुम्भ के अमृत की रक्षा की तथा शनि ने जयंत पर दृष्टि रखी कि कहीं वह स्वयं ही अमृत न पी जाए। पौराणिक कथा के अनुसार जयंत जब अमृत-कुम्भ की रक्षा हेतु उसे लेकर चले, तब जयंत और अमृत कलश की रक्षा में ग्रहों ने भी प्रमुख भूमिका निभाई।
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संगम तट
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आकाशमार्ग में विचरण करने वाले ग्रह-नक्षत्रों का विशेष राशि में योग अद्भुत संयोगों का सृजन करता है। कुम्भ, अर्द्धकुम्भ की गणना देवगुरु बृहस्पति के राशि संचार एवं माघ मास की अमावस्या के दिन सूर्य, चन्द्रमा के मिलन का अद्भुत संयोग है। वर्ष 2019 में माघ मास की अमावस्या के दिन सूर्य एवं चन्द्र मकर राशि में तथा बृहस्पति (गुरु) वृश्चिक राशि में संचार करने के कारण प्रयागराज में 15 जनवरी 2019 से 4 मार्च 2019 तक भव्य कुंभ का आयोजन किया जा रहा है।
इस अवसर पर प्रयागराज में स्नान-दानादि की महिमा अनन्त गुणा बढ़ जाती है, जो संगम के अक्षय क्षेत्र में अद्भुत संयोगों में स्नान, ध्यान, जप, तप, दान करता है, वह साक्षात् बृहस्पति और सूर्य के समान तेजस्वी होता है। मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी सोमवती अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा, महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबन्दी प्रयागराज में संगम तट पर स्नान-दान करने वालों को मनोवांछित फल एवं अक्षय पुण्य प्रदान करेगी।