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UP : हाईकोर्ट ने बलिया के एसपी को लगाई फटकार, कहा- यह हाईकोर्ट है ''कोई भी कोर्ट'' नहीं

Fri, 09 May 2025 06:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 09 May 2025 06:38 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजे गए जवाब में शब्दों का गलत चयन करने पर हाईकोर्ट ने बलिया के पुलिस अधीक्षक को कड़ी फटकार लगाई है। कहा कि यह हाईकोर्ट है, कोई भी न्यायालय नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि तहसीलदार राज्य के एक अधिकारी हैं वह एसपी के अधीन नहीं हैं। 

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High Court reprimanded the SP of Ballia, said- this is the High Court, not "any court"
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट एक प्रतिष्ठित संस्था है और यह न्यायालय है, ''कोई भी न्यायालय'' नहीं। पुलिस अधीक्षक को अपने हलफनामा में शब्दों के चयन के बारे में सावधान रहना होगा। कोर्ट ने एसपी को तीन दिन के भीतर नया और उपयुक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने गजेंद्र उर्फ धर्मात्मा की याचिका पर दिया।

बलिया के गजेंद्र रसड़ा निवासी हैं। सार्वजनिक उपयोग की जमीन को कुछ लोगों ने अतिक्रमण किया था। जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जनहित याचिका दाखिल की। कोर्ट के आदेश पर तहसीलदार ने मौका मुआयना किया और अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया, लेकिन पत्थर बाजी होने के चलते अतिक्रमण नहीं हटा पाए। इस पर कोर्ट ने एसपी से शपथपत्र मांगा था।

High Court reprimanded the SP of Ballia, said- this is the High Court, not "any court"

एसपी ने कोर्ट में प्रस्तुत हलफनामे में कहा कि उन्हें तहसीलदार, रसड़ा, बलिया से अतिक्रमण हटाने के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह "किसी भी अदालत" के आदेशों का पालन करने को हमेशा तैयार रहते हैं। अदालत ने “किसी भी अदालत” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायालय एक सम्मानित संस्था है और उसे इस प्रकार साधारण संदर्भ में नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि यह आदेश 24 घंटे के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बलिया के माध्यम से पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा दिया जाए। अगली सुनवाई नौ मई नियत की गई है।

High Court reprimanded the SP of Ballia, said- this is the High Court, not "any court"

तहसीलदार एक सहायक कलेक्टर हैं, वह एसपी के अधीन नहीं

न्यायालय ने एसपी के इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पुलिस बल के लिए तहसीलदार से कोई अनुरोध नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि तहसीलदार एक सहायक कलेक्टर हैं और वह राजस्व विभाग में राज्य का एक अधिकारी होता है। वह एसपी के अधीन नहीं हैं। अगर तहसीलदार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने जा रहा है तो वह एसपी को एक मांग पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी देगा। एसपी को स्वयं यह आकलन करना होगा कि उक्त कार्रवाई के लिए कितने पुलिस बल की आवश्यकता है। ताकि बेदखली आदेश का पालन करने के लिए राज्य को शर्मिंदगी न उठानी पड़े।

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