गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट/आतर हाथ सहार दै बाहर बाहै चोट...। अज्ञानता, अंधकार और मन के विकारों को दूर करने के लिए गुरुपूर्णिमा पर रविवार को शिष्यों ने गुरु ज्ञान अर्जित किया। चंद्रग्रहण पर दुर्लभ संयोग के बीच गुरु पीठों पर शिष्यों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए हाजिरी लगाई। गुरु दरबारों में आस्था, भक्ति और विश्वास पर भी कोविड-19 का ग्रहण साफ दिखा। शिष्यों ने अंतरमन से गुरुओं को नमन किया। पांव पखारने और छूने की मनाही रही।
गुरु पूर्णिमा: गुरु दरबारों में दूरी बनाकर भक्तों ने लगाई हाजिरी
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सूर्योदय के साथ ही गुरुओं के दरबार सज गए। गुरु शिष्य के परंपरा वाले गुरुकुलों, मठों और मंदिरों में गुरुओं की पूजा-अर्चना आरंभ हो गई। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से आश्रमों, मठों, मंदिरों में इस बार महोत्सव स्थगित कर दिए गए थे। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सुबह 8:30 बजे अलोपीबाग में शंकराचार्य चौक पर पहुंचकर आदिशंकराचार्य की प्रतिमा की पूजा की। इसके बाद आरती उतारी। फिर पौधरोपण भी किया।
इसके बाद आश्रम के ब्रह्म निवास स्थित शंकराचार्य मंदिर में भगवान राधा-माधव, ब्रह्मलीन शंकराचार्य ब्रह्मानंद सरस्वती, ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी शांतानंद एवं स्वामी विष्णुदेवानंद के अलावा श्रीयंत्र, हनुमान व गणेश की सविधि पूजा की। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का पादुका पूजन किया। इस मौके पर पं शिर्वाचन उपाध्याय शास्त्री, आचार्य छोटे लाल मिश्र, विपिन मिश्र सहित 11 वेदपाठी आचार्यों ने गुरु पूजन कराया। इस मौके पर दयाशंकर पांडेय, विनोदानंद, जितेंद्रानंद, ब्रह्मचारी, आत्मानंद, विशुद्धानंद, ओंकार नाथ त्रिपाठी, किन्नर अखाड़े की उत्तर भारत प्रमुख भवानी मां समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
इसी तरह बाघंबरी गद्दी मठ में योगाचार्य आनंद गिरि ने अपने गुरु अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का पादुका पूजन किया। बेनी बांध स्थित देवरहा बाबा आश्रम में गुरु पर्व पर गुरु पूजा की गई। किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरि टीना मां ने गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों सहित अपने गुरु का बैरहना में पूजन किया।
इस मौके पर शोभा, नैना, शिवानी, मनीषा, परी, आशा, शेरू सहित अन्य लोग उपस्थित थे। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महराज का शिष्यों ने पूजन किया। इसी तरह सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रनंद सरस्वती, महामंडलेश्वर सरयूदास त्यागी, ओम नम: शिवाय गुरुदेव ने शिष्यों को सही मार्ग पर चलने का संदेश दिया।