मंसूरअली पार्क में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में 22वें दिन रविवार को भी प्रदर्शन जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में पहुंचे प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो.अली जावेद ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर को काला कानून की संज्ञा देते हुए सरकार पर आंदोलन को मजहबी खानों में बांटने का आरोप लगाया।
मजहबी खानों में बांटने की कोशिश में लगी है सरकार : प्रो.जावेद
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कहा, सरकार इसे मजहबी रंग दे रही है जबकि यह अब आम लोगों का आंदोलन बन चुका है। शहर से शुरू हुआ आंदोलन अब गांव देहात में जन-जन तक पहुंच चुका है। लोग इसमें हिस्सेदारी कर रहे हैं, फिर चाहे वह मुसलमान हों या हिंदू। सभी धर्म और जाति के लोग सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार इसे स्वीकार नहीं करना चाहती है। यह देश आंबेडकर के संविधान और गांधी की अहिंसा की सोच से चलेगा न कि गोडसे की विचारधारा से। इस देश को हमारे पुरखों ने खून देकर सींचा है। यह हक की लड़ाई है जो काले कानून की वापसी तक जारी रखनी होगी।
प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ में हिंदू महासभा नेता की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि हत्यारों को सरकार गिरफ्तार करे। ऐसी घटनाओं को कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता उत्पला शुक्ला, अल्कारिया यासमीन, सबीहा मोहानी, नेहा यादव, सारा अहमद, एलआईसी कर्मचारी संघ नेता अविनाश मिश्रा, केके पांडेय, मो. राशिद, सानिया खान, परवीन, महमूदा, शुएब अंसारी, सैयद मोहम्मद, इरशाद उल्ला, अकीलुर्रहमान, फरीद अब्बासी, नीशू, सायरा, नफीस अनवर, अरशद अली, मोइन हबीबी सहित बड़ी संख्या में जुटीं महिलाओं ने अपनी बात रखी।
मंसूर अली पार्क में विभिन्न मोहल्लों से जुलूस की शक्ल में महिलाओं का जुटना रविवार को भी जारी रहा। दायराशाह अजमल, कोलहन टोला, हसन मंजिल, अकबरपुर, रसूलपुर, बैदनटोला, बहादुरगंज आदि क्षेत्रों से जुलूस निकाले गए। हाथों में तिरंगा और सीएए, एनआरसी तथा एनपीआर के खिलाफ स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर बड़ी संख्या में मंसूर अली पार्क पहुंचीं महिलाओं ने जमकर नारेबाजी भी की। अटाले से मोमबत्ती जुलूस निकाला गया।