गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर उमड़े रामकथा प्रेमियों के बीच जग विख्यात मानस कथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने शनिवार को बच्चों को भी मूल्यों, परंपराओं और आदर्शों का बोध कराया। उन्होंने बड़ों के आदर और माता पिता की सेवा का संदेश दिया। कहा कि जो माता-पिता का नहीं, वो राष्ट्र का भी नहीं हो सकता। वहीं, अभिभावकों को समझाया कि वह बच्चों को बड़ा होने से पहले मोबाइल न दें। मोबाइल की जगह प्यार-संस्कार और समय देने की कोशिश करें, ताकि उनको सही दिशा मिल सके।
बच्चों को मोबाइल नहीं, प्यार-संस्कार और समय दीजिएः मोरारी बापू
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मोरारी बापू ने कहा कि अपने बच्चों को एक उम्र तक मोबाइल मत दो। मोबाइल की जरूरत बच्चों को नहीं, बल्कि मम्मी को होती है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल की बजाए समय देने की जरूरत पर जोर दिया। कहा कि मम्मियों को किट्टी पार्टी में जाना होता है,इसलिए उनकेपास बच्चे के लिए वक्त नहीं होता। ऐसा मत कीजिए, बच्चों को समय दीजिए। उन्होंने पश्चिमी चलन से बचने की सीख दी। कहा कि हमारे पास अपनी विराट संस्कृति है। इसलिए अपनी मूल सभ्यता नहीं भूलनी चाहिए।
बच्चों को हिंसक दृश्यों वाले टीवी सीरियल न दिखाने के लिए भी उन्होंने प्रेरित किया। कहा कि बच्चों को रामायण दिखाओ। बापू ने कहा कि अंग्रेजी विश्व भर में बाजार की भाषा है। ऐसे में बच्चों को इंग्लिश मीडियम से पढ़ाएं, लेकिन अपनी मातृभाषा न भूलने दें। बच्चों को हिंदी वर्णमाला भी सिखाई जानी चाहिए। पढ़ाई केलिए बच्चों पर दबाव बनाने से भी बचने का उन्होंने संदेश दिया। मोरारी बापू की की कथा के केंद्र में इस दिन भी अक्षयवट ही रहा। उन्होंने वाल्मीकि आश्रम में स्थित सीता वट की महिमा बताई।
तुलसी की कवितावली का संदर्भ लेते हुए उन्होंने बताया कि जिस आश्रम में वाल्मीकि रहा करते थे, वहां मां जानकी का वट वृक्ष ‘सीता वट’ है। इस हर वट वृक्ष शिव स्वरूप है, लेकिन सीता वट राम स्वरूप है। इसके पत्तों में प्रभु सोते हैं। सीता वट धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रदाता है। सीता वट योगपीठ, प्रेम पीठ और वैराग्य पीठ है। राम भक्तों के लिए इस वट की महिमा अपार है।