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माघ मेला के स्तर से डेढ़ मीटर ऊपर गंगा, काम बाधित

Sat, 28 Dec 2019 12:27 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 28 Dec 2019 12:27 AM IST
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Ganges one and a half meters above Magh Mela level, work interrupted
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज

गंगा के जलस्तर में वृद्धि ने माघ मेला क्षेत्र का दायरा घटाने के साथ ही तैयारियों पर भी असर डाल दिया है। स्नान घाटों के निर्माण के साथ ही पेयजल की पाइप लाइन बिछाने और चकर्ड प्लेट की सड़कें बनाने का काम दलदल के चलते लगातार पिछड़ता जा रहा है। शुक्रवार को फाफामऊ में गंगा का जल स्तर माघ मेला बसाने के लिए निर्धारित लेबल 76 मीटर से 1.53 मीटर अधिक यानी 77,53 मीटर रिकार्ड किया गया। ऐसे में माघ मेले के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का विकास करने वाले विभागों के अफसरों के माथे पर बल पड़े गए हैं। 

Ganges one and a half meters above Magh Mela level, work interrupted
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज

जाड़े के मौसम में कई इलाकों में वर्षा होने की वजह से जहां रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी की मांग न के बराबर रह गई है, वहीं बांधों से गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को भी कानपुर से 15 हजार क्यूसेक जल गंगा में छोड़ा गया। गंगा में अविरलता-निर्मलता बनाए रखने के लिए साधु-संतों की मांग पर कुंभ में सिर्फ सात हजार क्यूसेक पानी ही रोजाना गंगा में छोड़ा जा रहा था। लगातार प्रवाह बढ़ने से माघ मेला बसाने में जबरदस्त दिक्कतें पैदा हो गई हैं। गंगा में प्रवाह बढ़ने से माघ मेला क्षेत्र में लगातार कटान हो रही है।

Ganges one and a half meters above Magh Mela level, work interrupted
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज

जल निगम की ओर से मेला क्षेत्र के पांचों सेक्टर में कल्पवासियों, श्रद्धालुओं और संतों के शिविरों तक पेयजल पाइप लाइन बिछाने का काम दलदल के चलते बाधित हो रहा है। संगम नोज से लेकर अन्य स्थानों तक स्नान घाट के निर्माण में भी दिक्कतें पैदा हो गई हैं।  मेला क्षेत्र को यातायात से जोड़ने के लिए मोरी मार्ग से लेकर अरैल के बीच चकर्ड प्लेट मार्गों का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। सिंचाई बाढ़ खंड के अफसरों का कहना है कि जाड़े में बारिश के चलते दिक्कतें बढ़ी हैं। खेतों में दूसरी सिंचाई के लिए पानी की मांग अगर दो-तीन दिन में हुई तो नहरों में पानी डायवर्ट किया जा सकता है। ऐसा हुआ तो माघ मेला के शिविरों व अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण के लिए बड़ी राहत मिल सकती है।

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