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विदेशियों, प्रवासी भारतीयों को खींच लाया कुंभ का आकर्षण, बोले-‘दिस इज अमेजिंग एक्सपीरियंस'

Wed, 26 Dec 2018 04:44 PM IST
देव कश्यप अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज
अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Wed, 26 Dec 2018 04:44 PM IST
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Foreigners and NRI attract towards attraction of Kumbh 2019, says This is Amazing Experience
जूना अखाड़े की पेशवाई को देख अचंभित रहे विदेशी - फोटो : अमर उजाला

कुंभ का आकर्षण विदेशियों तथा प्रवासी भारतीयों को भी संगम की रेती पर खींच लाया। वे रेती के आकर्षण से न सिर्फ अभिभूत दिखे, बल्कि उन्होंने हर किसी को यहां आने का न्योता देने का संकल्प दोहराया। कई जूना के संत बन गए हैं तो कई यहां की छवियों से रोमांचित हैं। जूना अखाड़े की पेशवाई में जूना पीठाधीश्वर के साथ अमेरिका से आईं रिचा नारायण मेले को देखकर अभिभूत थीं। बोलीं, ‘दिस इज ए ग्रेट एक्सपीरियंस फॉर मी, आईएम वेरी ब्लेस दैट आई वाज ऑन द रथ विथ स्वामी जी। थैंक यू स्वामी जी, थैंक यू इंडिया।’

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आस्ट्रेलिया की रिनेस ने कहा, दिस इज अमेजिंग एक्सपीरियंस फॉर अस, एब्सल्यूटली वंडरफुल। इट इज स्प्रीचुअल एक्सपीरियंस, आई से एवरीवाडी टू कम दिस प्लेस।’ पहली बार भारत आईं उनकी बेटी के लिए यह सब कुछ चकित करने वाला रहा। उसने कहा, अब से पहले मैंने सिर्फ किताबों में पढ़ा ही था, आज उसे देखने का भी अवसर मिला है। यह पल मेरे लिए अविस्मरणीय हैं। इससे पहले सभी ने महामंडलेश्वरों के पांव छूकर आशीर्वाद लिया और उनसे भारतीय सनातन संस्कृति के सूत्र भी सीखे।
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हनुमान पुरी बन हुए मुग्ध
भारतीय संस्कृति के आकर्षण में विदेशी ऐसे रमे कि स्वीडन से आए कैनथ जॉन अब ‘हनुमान पुरी’ बनकर मुग्ध रहे। इसी तरह श्रीमहंत विश्वंभर भारती के शिष्य भी अब अलख नारायण भारती होकर आराधना में तल्लीन हैं।

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छावनी में महिला संतों, साध्वियों का भी डेरा

Foreigners and NRI attract towards attraction of Kumbh 2019, says This is Amazing Experience
छावनी में महिला श्रीमहंतों, साध्वियों ने भी डेरा डाला - फोटो : अमर उजाला

जूना अखाड़े की पेशवाई के साथ ही छावनी में महिला श्रीमहंतों, साध्वियों ने भी डेरा डाला। अखाडे़े की श्रीमहंत मीरापुरी, अंतर्राष्ट्रीय श्रीमहंत आराधना गिरि, अंबाला से श्रीमहंत राधागिरि, सिरसा, हरियाणा की साध्वी वृत्तिकानंद गिरि, वृंदावन की साध्वी ऋषिका आदि ने कहा अब कुंभ पर्व के दौरान अनेक अनुष्ठान होंगे।

जगह-जगह अखाड़े के संतों का किया गया भव्य स्वागत
पेशवाई के दौरान अखाड़े के संतों, श्रीमहंतों का जगह-जगह स्वागत किया गया। कुंभ मेला कार्यालय के सामने कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद, डीआईजी कुंभ मेला कवीन्द्र प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक प्रोटोकॉल पूर्णेंदु सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने माल्यार्पण करके सतों का स्वागत किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास, निर्मोही अनी के श्रीमहंत राजेंद्र दास, दिगंबर अनी की श्रीमहंत कृष्णदास नगरिया, निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी, श्रीमहंत आशीष गिरि आदि ने भी संतों को माल्यार्पण किया।
इसी क्रम में प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी माधवानन्द, नैमिष पीठाधीश्वर लक्ष्येश्वर आश्रम, महंत मोहन गिरि, महंत बलदेव गिरि, महंत शंकर पुरी, महंत मनोज भारती, महंत वासुदेवानन्द सरस्वती, महंत संतरानन्द सरस्वती, थानापति आत्मानन्द,प्रभाशंकर अमित शास्त्री, ओम प्रकाशानंद, भरत जी शर्मा अतुलानंद, नेहा भारती, संगीता शर्मा, प्रकाशानंद, नागेंद्रानंद, शारदानंद आदि ने भी पेशवाई के दौरान राजेराजेश्वरी पीठ के सामने माल्यार्पण करके संतों का स्वागत किया।

आचार्य महामंडलेश्वर ने की निर्विघ्न कुंभ की कामना

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जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि

जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने निर्विघ्न कुंभ की कामना की है। कहा, जिस तरह वृक्ष फल, फूल, छाया, गंध-सुगंध आदि सभी के लिए है, उसी तरह से संन्यासी सभी के लिए होता है। संन्यास का अर्थ परमार्थ है। हम लोककल्याण की भावना और सहअस्तित्व के सूत्रवाक्य के साथ यहां आए हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, पेशवाई का अर्थ है समष्टि के कल्याण के लिए यतियों का एकजुट होना। कुंभ की संस्कृति एकात्मता का संदेश देती है। यहां गंगा के तट पर हम एकहैं। यहां सन्यासी एकसाथ पहुंचे हैं। हमारी संस्कृति विश्व बंधुत्व का भाव देती है। सभी उपासक यहां आए हैं।

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