बांध और बैराजों से छोड़े गए पानी ने मंगलवार की शाम से झूंसी के तटवर्ती इलाकों में अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। गंगा-यमुना में आए भारी उफान के कारण झूंसी कोहना और नई झूंसी में गंगातट के किनारे बने मकानों के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी दाखिल हो गया। प्रभावित परिवारों ने मकान के दूसरे मंजिल में अपना ठौर जमाया है। बाढ़ के पानी में झूंसी के आधा दर्जन से ज्यादा कछारी गांव के खेत समाने लगे हैं। इससे सैकड़ों बीघे फसल भी नष्ट हो गई है।
Prayagraj flood news: बाढ़ का पानी तटवर्ती गांव के घरों में घुसा, मचा हड़कंप
बांध और बैराजों से पांच दिन पहले कई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। मंगलवार की शाम बाढ़ का कानपुर-प्रयागराज होते हुए झूंसी तक पहुंच गया। इससे गंगा के किनारे बसे परिवारों में हड़कंप मच गया। झूंसी कोहना गांव तथा नई झूंसी में किनारे बने मकानों के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी दाखिल हो गया। प्रभावित परिवारों ने मकान के ऊपरी मंजिल में ठौर जमाया है। देर शमा तक प्रभावित परिवार के लोग अपना सामान समेटते रहे।
इसके साथ ही झूंसी के कछारी गांव के खेतों को भी बाढ़ के पानी में अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। गंगा का जलस्तर बढऩे पर कछार के बदरा-सोनौटी, ढोलबजवा, हेतापट्टी, शेरडीह समेत आधा दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
बाढ़ के पानी के कारण सैकड़ों बीघे फसल भी बर्बाद हो गई है। बुधवार की देर शाम तक बाढ़ के पानी के बढऩे का क्रम चलता रहा। ग्रामीणों की माने तो हर घंटे बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। अगर जलस्तर बढ़ता रहा तो बृहस्पतिवार की शाम तक बदरा-सोनौटी मार्ग भी बाढ़ की चपेट मेें आ जाएगा। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीण बुरी तरह भयभीत हैं।
चार साल पहले बाढ़ ने मचाई थी तबाही
गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर से झूंसी के एक दर्जन कछारी गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। चार साल पहले बाढ़ ने प्रभावित गांवों में जमकर तबाही मचाई थी। ग्रामीणों के मेहनत की कमाई से तैयार किया गया आशियाना पल भर में ही बाढ़ ने ढहा दिया था। यही वजह है कि बरसात के मौसम में तटवर्ती गांव के ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों पर चले जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जलस्तर के बढऩे का क्रम जारी रहा तो भारी तबाही से इंकार नहीं किया जा सकता है।