एक दिन पहले गिरफ्तार किए गए जमातियों समेत 30 लोगों को जेल भेजे जाने की कार्रवाई के दौरान माहौल बेहद संगीन रहा। करेली स्थित गेस्ट हाउस में दोपहर में भारी फोर्स को देखकर जमातियों के होश उड़ गए। उधर गेस्ट हाउस से निकालकर एंबुलेंस में बैठाए जाने के दौरान करेली स्थित मस्जिद का मुतवल्ली की आंखों में आंसू आ गए।
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20 जमातियों व नौ अन्य लोगों को करेली के जिस महबूबा पैलेस गेस्ट हाउस में क्वारंटीन किया गया था, सोमवार रात गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें वहीं रखा गया। सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे। मंगलवार दोपहर 12 बजे के करीब यहां एक के बाद एक कई थानों की फोर्स का पहुंचना शुरू हुआ। देखते ही देखते वहां पांच थानों की फोर्स पहुंच गई जिसे देखकर जमातियों के होश उड़े रहे।
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मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि चौतरफा खुद को फोर्स से घिरा देख जमाती खौफजदा रहे। यही वजह थी कि वह आपस में भी बातें करने से कतराते रहे। थाईलैंड से आए नौ जमातियों का करेली पुलिस ने गेस्ट हाउस में ही बयान दर्ज किया। मददगार के रूप में इनके साथ आए भारत के ही दो अलग-अलग राज्यों के जमातियों की मदद से पुलिस ने इनका बयान दर्ज किया।
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करेली के जिस हेरा मस्जिद में यह नागरिक मिलेे, उसका मुतवल्ली उजैफा भी यहां गिरफ्तार कर रखा गया था। पुलिस ने जब उसका बयान दर्ज करना शुरू किया तो वह बिलखने लगा। किसी तरह समझाकर उसका बयान दर्ज किया गया। उधर जब इन सभी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के लिए गेस्ट हाउस से निकालकर एंबुलेंस में बैठाया गया तो भी उसकी आंखें नम हो गईं।
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उधर शाहगंज में मिले इंडोनेशियाई नागरिकों का बयान पहले ही दर्ज किए जाने की वजह से पुलिस ने उनसे कोई बात नहीं की। केरल व पश्चिम बंगाल से आए उनके मददगार भी खामोश होकर पुलिस की कार्रवाई देखते रहे। पूछने पर उन्होंने पुलिस को सिर्फ इतना बताया कि वह इंडोनेशिया से आए नागरिकों के नियमित गाइड नहीं बल्कि सिर्फ खिदमतगार हैं। ऐसे में उन्हें भी उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं मालूम है।