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डाला छठ : व्रतियों ने बनाई वेदियां, आज से चार दिवसीय सूर्योपासना

Wed, 18 Nov 2020 01:45 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 18 Nov 2020 01:45 AM IST
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Dala Chhath: Vratis made altars, four-day Suryopasana from today
prayagraj - फोटो : prayagraj
सूर्योपासना का चार दिवसीय डाला षष्ठी व्रत नहाय खाय के साथ बुधवार को आरंभ हो जाएगा। संगम समेत गंगा, यमुना के तटों पर वेदियां बनाई जाने लगी हैं। संतान प्राप्ति केलिए किए जाने वाले इस व्रत में गन्ने केमंडप में वेदियों पर अखंड दीप जलाकर घर, परिवार से लेकर राष्ट्र तक की खुशहाली की कामना से छठ पूजा की जाएगी। 20 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।

 
Dala Chhath: Vratis made altars, four-day Suryopasana from today
prayagraj - फोटो : prayagraj
सुहागिन महिलाओं से लेकर कुंवारी कन्याओं तक के लिए डाला षष्ठी की उपासना फलदायी होगी। यही वजह है कि कोविड-19 के संक्रमण के बावजूद घर-घर में छठ पूजा की तैयारी की गई है। घाटों पर व्रतियों के लिए इंतजाम शुरू हो गए हैं। मंगलवार को संगम नोज पर घाटों की समतलीकरण करने के साथ ही स्नान घाटों का निर्माण किया गया।
Dala Chhath: Vratis made altars, four-day Suryopasana from today
prayagraj - फोटो : prayagraj
किला घाट से संगम के बीच कटान वाले हिस्सों को पाट कर दुरुस्त किया गया। इसी के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घाटों पर व्रतियों के प्रवास की भी तैयारियां की जा रही हैं। सुरुज देव के गीत घरों में शुरू हो गए हैं।
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Dala Chhath: Vratis made altars, four-day Suryopasana from today
prayagraj - फोटो : prayagraj
नहाय खाय के साथ बुधवार को चार दिवसीय व्रत की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए मंगलवार को व्रतियों के परिजनों ने नए परिधानों जैसे साड़ी,लहंगा, सूट और पुरुषों के लिए कुर्ता-पाजामा की खरीद की। बांस की टोकरियां खरीदने के लिए बाजार में भीड़ लगी रही। सूप के साथ बांस की टोकरी और तरह-तरह के फल भी खरीदे गए।
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Dala Chhath: Vratis made altars, four-day Suryopasana from today
prayagraj - फोटो : prayagraj
अल्दी-चंदन की अल्पनाएं वेदियों पर बनाकर अकंड दीप जलाए जाएंगे। घरों से छठ माता केगीत गाती हुए महिलाएं घाटों के लिए निकलेंगी। बुधवार को नहाय खाय के बाद बृहस्पतिवार को खरना होगा।

शुक्रवार की शाम घरों से बाजे गाजे के साथ व्रती महिलाएं घाटों पर पहुंचकर कमर या घुटने तक जल में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगी। इसके बाद कुछ व्रती महिलाएं रात भर वेदियों पर ही अपनी कामना के गीत गाकर रात भर जागरण करेंगी।  फिर सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस व्रत का पारण किया जाएगा।
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