गुरुवार को पेशवाई के साथ ही फिलहाल अटल अखाड़े की परिषद भंग हो गई। अखाड़े के अष्टकौशल के श्रीमहंत सत्यम गिरि के मुताबिक अब दूसरे शाही स्नानपर्व यानी मौनी अमावस्या के स्नानपर्व के बाद नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।
कुंभ 2019: पेशवाई के साथ ही भंग हुई अटल अखाड़े की परिषद, दूसरे शाही स्नान के बाद होगा चुनाव
भालों की हुई पूजा, पुकार भी
मेला क्षेत्र स्थित छावनी में पेशवाई के पहुंचने पर अखाड़े के पुरोहित पंडित गंगाधर दुबे ने ध्वज और गुरु महाराज सहित भालों और त्रिशूल की पूजा कराई। बाद में अखाड़े की परंपरा के अनुसार धर्मध्वजा के पास पुकार भी हुई। यहां आचार्य महामंडलेश्वर सहित अन्य महामंडलेश्वरों ने भी गुरु महाराज के चरणों में अपनी ओर से ‘पुकार’ के तहत दक्षिणा भेंट की।
तिलक लगाकर स्वागत, बरसाए फूल
प्रयागराज। पेशवाई जिस मार्ग से होकर निकली उसके दोनों ओर सड़क और मकानों की छतों, बारजों से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों ने संतों पर फूल बरसाए। पेशवाई जब मध्य दारागंज स्थित धकाधक चौराहे पर पहुंची तो भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष अनुपमा पांडेय के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं ने केसर का तिलक लगाकर महिला संतों, महामंडलेश्वर एवं उनके संग आए विदेशी अनुयायियों का स्वागत किया। प्रयागराज सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित धर्मराज पांडेय केसी पांडे, डीआर पांडे आदि ने संतों पर फूल बरसाए। मेला क्षेत्र में पहुंचने पर कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद, डीआईजी कुंभ कविंद्र प्रताप सिंह सहित प्रशासन, पुलिस के अन्य अधिकारियों ने भी माल्यार्पण करके संतों का स्वागत किया।
प्रयागराज सेवा समिति की ओर से संचालित संगम विश्व धरोहर अभियान को अटल अखाड़े का भी समर्थन मिला। अटल अखाड़े की पेशवाई के दौरान तकरीबन सभी महामंडलेश्वरों के रथों पर ‘संगम विश्व धरोहर’ के पोस्टर लगे। साथ ही समिति के सदस्यों ने सभी से समर्थन में हस्ताक्षर भी कराया।
संयोजक तीर्थराज पांडेय ‘बच्चा भइया’ने कहा, कुंभ की तरह संगम को भी यूनेस्को से विश्व धरोहर का दर्जा मिले, के मकसद से जारी मुहिम को संतों, श्रद्धालुओं ने समर्थन दिया। इसमें विदेश से आए भक्त, श्रद्धालु भी शामिल थे। बीते बारह वर्षों से जारी मुहिम को अब तक कई अख्राड़ों का समर्थन मिल चुका है। सभी ने एक स्वर में पूरे कुंभ मेले के दौरान संगम के लिए अलख जगाने की अपील की।