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हाथी, घोड़ा, बग्घी संग सेना ने संगम तीरे निकाला निशान जुलूस

Sun, 02 Feb 2020 12:21 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 02 Feb 2020 12:21 AM IST
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Army marches with elephant, horse and wagons to mark confluence procession
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज

शनिवार की सुबह सेना का एक बदला रूप नजर आया। संत महात्माओं की तरह सेना के अफसर और जवान शनिवार की सुबह माघ मेला क्षेत्र में भगवान की भक्ति में तल्लीन दिखे। उनके हाथ में बंदूक नहीं, बल्कि तमाम तरह के ध्वज थे। आधुनिक वाहनों की बजाय ये अफसर और जवान हाथी, घोड़ा और बग्घी में बैठे नजर आए। मौका था सेना की निशान यात्रा का। हर वर्ष की तरह इस बार भी माघ मेले के अवसर पर गंगा पूजन के लिए सेना की निशान यात्रा आयुध भंडार किला से निकली। जो त्रिवेणी मार्ग, बांध होते हुए संगम तक गई।

Army marches with elephant, horse and wagons to mark confluence procession
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज

दरअसल सेना द्वारा कई दशक से हर वर्ष गंगा पूजन के लिए ओडी फोर्ड से निशान जुलूस निकाला जाता है। इस बार यह जुलूस शनिवार को निकाला गया। इसकी अगुवाई ओडी फोर्ट के कर्नल विवेक डबास ने की। कर्नल डबास हाथी पर सवार होकर निशान जुलूस में सबसे आगे रहे। उनके पीछे अन्य अफसर घोड़े, बग्घी आदि में सवार होकर संगम तट पर पहुंचे। जुलूस के दौरान ओडी फोर्ट के विभिन्न विभागों के असैन्य कर्मियों ने भी शिरकत की। सभी ने अपने अलग-अलग निशान वाले झंडे ले रखे थे। सेना की इस निशान यात्रा को देखने के लिए त्रिवेणी मार्ग, बांध पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ भी जुटी।

Army marches with elephant, horse and wagons to mark confluence procession
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
ढोल नगाड़े की थाप के बीच यह निशान यात्री धीरे-धीरे बढ़ते हुए अपने गंतव्य तक गई। तमाम बग्घी में बैठकर सेना के अफसर अपने परिवार के सदस्यों के साथ संगम नोज तक गए। इस दौरान उप समादेश ले. कर्नल राकेश मदान ने कर्नल विवेक डबास के साथ गंगा पूजन किया। ओडी फोर्ट के कर्मचारी योगेश यादव ने बताया देश की आजादी के बाद किला भारतीय सेना को मिला। वर्ष 1965 में भारत सरकार  द्वारा किले को खाली कराने तथा पर्यटन विभाग को देने का प्रस्ताव किया गया। इसका तब सभी कर्मचारियों ने विरोध किया और मां गंगा से प्रार्थना की कि किला वह खाली नहीं करेंगे। तब से अब तक इस परंपरा का पालन किया जा रहा है और हर वर्ष गंगा पूजन के लिए निशान यात्रा निकाली जाती है। 
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Army marches with elephant, horse and wagons to mark confluence procession
magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
magh mela prayagraj
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