इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के समर्थन में संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार किया। इसके साथ ही महाविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन ऑक्टा ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र भेजकर प्रो. हांगलू की बहाली की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि उनकी बहाली न होने की दशा में कार्य बहिष्कार जारी रहेगा और इस दौरान कक्षाओं के साथ परीक्षाओं का बहिष्कार भी होगा।
कुलपति के समर्थन में इलाहाबाद विवि शिक्षकों ने किया कार्य बहिष्कार
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कुलपति के समर्थन में ऑक्टा के बैनर तले महाविद्यालयों के शिक्षक बृहस्पतिवार को सीएमपी डिग्री कॉलेज में जुटे और मानव श्रृंखला बनाई। इसके बाद कुलपति के समर्थन में सभा की गई और सीएमपी से सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे तक पैदल मार्च निकाला गया। ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह एवं महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि कुलपति ने कॉलेजों को पीजी का तोहफा दिया, जिसकी मांग वर्ष 1967 से की जा रही थी। कॉलेज में पीएचडी का कोर्स शुरू करने की मंजूरी दी। इससे शोध के अवसर बढ़े।
कुलपति ने अपने चार वर्षों के कार्यकाल में कई ऐसे काम किए, जो पिछले 40 वर्षों में नहीं हुए। पूर्व शिक्षकों के गुट ने शिक्षक भर्ती में अड़ंगा लगाया। कुलपति ने पहले चरण में भर्ती पूरी करा दी और कॉलेजों में हालत सुधरने लगे तो पूर्व शिक्षकों को यह अच्छा नहीं लगा, क्योंकि इससे विश्वविद्यालय में उनका दबदबा खत्म होने लगा। ऐसे लोग छात्र नेताओं को पैसा देकर कुलपति के खिलाफ आंदोलन कराते रहे। ऑक्टा मांग करता है कि कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को वापस लाया जाए। अध्यक्ष एवं महासचिव ने बताया कि प्रो. हांगलू की कुलपति के पद पर बहाली नहीं हुई तो कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। शिक्षक सुबह 10 से शाम चार बजे तक कॉलेज में उपस्थित तो रहेंगे लेकिन कोई काम नहीं करेंगे।
इस्तीफे के लिए कुलपति पर मंत्रालय ने बनाया दबाव
इविवि के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दबाव में आकर इस्तीफा दिया है। यह आरोप ऑक्टा की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में लगाया गया है। साथ ही आशंका जताई गई है कि कुलपति के जाने से विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में अराजकता फैलने का खतरा है।
ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह एवं महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय के कुछ अधिकारी लगातार फोन करके कुलपति पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे थे। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी ऑक्टा महासचिव ने बताया कि कुलपति से फोन पर हुई उनकी बातचीत के दौरान कुलपति ने कहा कि इस्तीफा उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से नहीं, बल्कि मंत्रालय के दबाव में आकर दिया है। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में यह भी कहा गया है कि पिछले चार वर्षों से एक गुट लगातार कुलपति की शिकायतें करता रहा लेकिन अब तक कोई भी अनियमितता नहीं प्रमाणित हुई।