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कौन था अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला, पढ़ें कैसे पहुंचा अपराध की दुनिया के शिखर तक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Updated Fri, 02 Nov 2018 03:12 AM IST
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फाइल फोटो
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पीसीबी हॉस्टल में गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला शातिर अपराधी था। उस पर लगभग डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज थे, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, रंगदारी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। दो मामले पुलिस पर फायरिंग करने के हैं। खास बात यह कि उस पर शहर से लेकर लखनऊ तक आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने का आरोप था। कर्नलगंज पुलिस की मानें तो अच्युतानंद पर पहला मुकदमा 2011 में दर्ज हुआ। तब वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्र था।
अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद जरायम की दुनिया में उसने कदम रखा तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के आरोप में उस पर केस लदते चले गए। पुलिस की मानें तो उस पर पहला मुकदमा रंगदारी मांगने के आरोप में दर्ज हुआ। 2012 में वह तब चर्चा में आया जब कटरा में कांस्टेबल नरेश कुमार को गोली मार दी थी। गोली लगने से नरेश घायल हुआ था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
2013 में छात्रनेता अजीत यादव पर हुए जानलेवा हमले के मामले में भी उसका नाम आया। इधर, शिवकुटी में पीछा कर रही पुलिस टीम पर फायरिंग करने के आरोप में भी उस पर मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 2014 में लखनऊ में हुए डबल मर्डर में नाम आया तो सुमित के नाम से दहशत फैलने लगी। पुलिस के साथ ही इस मामले में उसकी तलाश एसटीएफ भी लगी थी। कुछ दिनों बाद ही पीसीबी हॉस्टल में छात्रों पर गोली चलाने के आरोप में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ।
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मौके पर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला
जिसके बाद पुलिस की ओर से उसकी गिरफ्तारी पर 5000 का इनाम भी घोषित किया गया। 2016 में आखिरकार वह हत्थे चढ़ा जब एसटीएफ ने उसे वाराणसी के सारनाथ से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने कबूल किया था कि पैसों को लेकर हुए विवाद में उसने 28 जनवरी 2014 को गोमती नगर के विशाल खंड में आशीष मिश्रा व रोहित शुक्ला को मौत के घाट उतार दिया था।
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मौके पर पुलिस और परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इस वक्त तक सुमित पर कुल 14 मुकदमे दर्ज हो चुके थे। इसके बाद 2017 में जार्जटाउन थाना क्षेत्र में एक युवक को जिंदा जलाने के प्रयास के आरोप में उस पर केस दर्ज हुआ। इंस्पेक्टर कर्नलगंज सत्येंद्र सिंह का कहना है कि सुमित पर लगभग डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज थे।