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UP: प्रतिमा हटाने पर बवाल... हल्के में लेता रहा अमला, दो जातियों के बीच दस दिन से सुलग रही थी विवाद की चिंगारी
Wed, 29 Jan 2025 03:29 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 29 Jan 2025 03:29 PM IST
सार
अलीगढ़ के भीमपुर-इब्राहिमपुर गांव में दो जातियों के बीच पिछले दस दिनों से तनातनी थी। अमला हल्के में लेता रहा। एक पक्ष मंदिर तो दूसरा आंबेडकर की प्रतिमा लगाने पर अड़ा हुआ था। कई दफा पुलिस पहुंची लेकिन विवाद का हल कोई नहीं तलाश पाया।
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caste clash in aligarh
- फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ से सटे रोरावर क्षेत्र के गांव इब्राहिमपुर-भीमपुर में रविवार की रात को लगाई गई आंबेडकर की प्रतिमा को पुलिस द्वारा हटाने पर मंगलवार की शाम को बवाल हो गया। गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। पथराव में इलाका एसएचओ सहित 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए। भीड़ ने पुलिस कर्मियों की छह बाइकें और एक स्कूटी फूंक दी, पुलिस के चार पहिया वाहनों में भी तोड़फोड़ कर दी।
भीड़ ने वाहनों को फूंका
- फोटो : अमर उजाला
दो जातियों के बीच दस दिन से सुलग रही थी विवाद की चिंगारी
अलीगढ़ के भीमपुर-इब्राहिमपुर गांव में दो जातियों के बीच पिछले दस दिनों से तनातनी थी। यहां ग्राम समाज की जमीन के दो खाली प्लॉट हैं जिन पर एक पक्ष मंदिर का निर्माण कराना चाहता था तो दूसरा पक्ष आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने पर अड़ा था। शिकायत के बाद पहुंची पुलिस ने मंदिर का निर्माण तो रुकवा दिया लेकिन आंबेडकर की प्रतिमा लगाए जाने की खबर अफसरों को नहीं हुई। रातों रात प्रतिमा स्थापित कर दी गई। अगर पुलिस ने उसी समय सावधानी बरती होती हो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
अलीगढ़ के भीमपुर-इब्राहिमपुर गांव में दो जातियों के बीच पिछले दस दिनों से तनातनी थी। यहां ग्राम समाज की जमीन के दो खाली प्लॉट हैं जिन पर एक पक्ष मंदिर का निर्माण कराना चाहता था तो दूसरा पक्ष आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने पर अड़ा था। शिकायत के बाद पहुंची पुलिस ने मंदिर का निर्माण तो रुकवा दिया लेकिन आंबेडकर की प्रतिमा लगाए जाने की खबर अफसरों को नहीं हुई। रातों रात प्रतिमा स्थापित कर दी गई। अगर पुलिस ने उसी समय सावधानी बरती होती हो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
पुलिस की गाड़ी में तोड़फोड़
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल दस दिन पहले ग्राम समाज की भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए नींव रखी गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में बघेल समाज के लोग मौजूद थे। इसी दौरान दूसरे समाज के लोगों ने थाना पुलिस को शिकायत कर दी कि गांव में ग्राम समाज की भूमि पर बिना प्रशासनिक अनुमति के मंदिर का निर्माण हो रहा है। पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर का निर्माण रुकवा दिया। पुलिस भी गांव से लौट आई। लेकिन यहां दूसरे प्लॉट पर आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी गई। जब लोगों ने सुबह को देखा तो विरोध शुरू हो गया। पुलिस फिर पहुंची तो लेकिन भीड़ को देख प्रतिमा नहीं हटवा सकी। हालांकि अधिकारियों ने लोगों को समझाने की भरसक कोशिश की मगर कोई तैयार ही नहीं हुआ।
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स्कूटी में तोड़फोड़
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे रखी गई इस विवाद की नींव
गांव भीमपुर इब्राहिमपुर लोध, बघेल, अनुसूचित वर्ग बहुल है। गोंडा रोड पर बसे इस गांव में ग्राम समाज की एक भूमि के टुकड़े पर करीब दस दिन पहले बघेल समाज के लोगों ने मंदिर का निर्माण शुरू कराया। उसके निर्माण में अनुसूचित वर्ग के मजदूर लगे थे। इन मजदूरों ने मंदिर निर्माण करते समय यह तर्क रखा कि जब आप लोग मंदिर बनवा रहे हो तो हम बगल की भूमि पर डा. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करा लें। इस बात पर वहां तनातनी हुई और बात अनुसूचित वर्ग से ताल्लुक रखने वाले पूर्व प्रधान तक पहुंची। वहीं से विवाद की नींव रख गई। पूर्व प्रधान की अगुवाई में अनुसूचित वर्ग के लोगों ने ग्राम समाज की भूमि पर मंदिर निर्माण की शिकायत पुलिस प्रशासन से कर दी।
गांव भीमपुर इब्राहिमपुर लोध, बघेल, अनुसूचित वर्ग बहुल है। गोंडा रोड पर बसे इस गांव में ग्राम समाज की एक भूमि के टुकड़े पर करीब दस दिन पहले बघेल समाज के लोगों ने मंदिर का निर्माण शुरू कराया। उसके निर्माण में अनुसूचित वर्ग के मजदूर लगे थे। इन मजदूरों ने मंदिर निर्माण करते समय यह तर्क रखा कि जब आप लोग मंदिर बनवा रहे हो तो हम बगल की भूमि पर डा. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करा लें। इस बात पर वहां तनातनी हुई और बात अनुसूचित वर्ग से ताल्लुक रखने वाले पूर्व प्रधान तक पहुंची। वहीं से विवाद की नींव रख गई। पूर्व प्रधान की अगुवाई में अनुसूचित वर्ग के लोगों ने ग्राम समाज की भूमि पर मंदिर निर्माण की शिकायत पुलिस प्रशासन से कर दी।
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प्रतिमा हटाने को लेकर बवाल
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर निर्माण रुकवा दिया और खुद बगल की भूमि पर आंबेडकर प्रतिमा लगाने की कवायद शुरू कर दी। इसी कवायद के क्रम में 23 जनवरी को दिन में डायल-112 पर डा.आंबेकर प्रतिमा लगाने की शिकायत पहुंची। इस सूचना पर पुलिस आई। मगर बिना रोक-टोक के मौका मुआयना कर लौट गई। इसके बाद न हल्का दरोगा ने ध्यान दिया। न इलाका एसएचओ ने गंभीरता दिखाई और यहां डा.आंबेडकर प्रतिमा लगाने को बेसमेंट तक बन गया। खुफिया टीम भी सोती रही। दो रात पहले रात में प्रतिमा तक लगा दी गई।