रसूख या रंगदारी से जुड़े जो कयास थे, वे गलत साबित हुए। पश्चिमी यूपी के लॉजिस्टिक व सीमेंट कारोबारी संदीप गुप्ता की हत्या उस ‘बेटी’ की मदद और ‘दामाद’ की बेइज्जती के बदले हुई, जिस शादी में वे बिचौलिया बने थे। सबसे खास बात यह है कि इस हत्या को बेहद सुनियोजित तरीके से दोस्तों के ऐसे ‘गैंग’ ने अंजाम दिया जो अब तक गैर पेशेवर माना जा रहा है। और तो और किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगने दी। खुद पुलिस व जरायम पेशेवर यह जानकर हैरान हैं कि इतनी सुनियोजित साजिश अर्से बाद शहर में किसी गैर पेशेवर ‘गैंग’ ने रची है।
संदीप गुप्ता हत्याकांड: बिन मां-बाप की बेटी की मदद व दामाद की बेइज्जती के बदले मिली संदीप को मौत
बिन मां-बाप की बेटी की मदद में ऐसे पैदा हुई रंजिश
पुलिस खुलासे के अनुसार, संदीप ने अलीगंज के ही अपने बेहद करीबी दोस्त कहें या परिवार के सदस्य सुधीर गुप्ता की बेटी दीप्ति की शादी खुद के साथ कासिमपुर सीमेंट फैक्टरी से जुड़े ट्रांसपोर्टर राजीव अग्रवाल के बेटे अंकुश संग फरवरी 2016 में कराई। इस दौरान दीप्ति अंकुश दंपती से एक बेटी भी हुई। मगर उन्हें कोरोना में अपने दोस्त दंपती की मौत के बाद पता चला कि दीप्ति को ससुराल में तंग किया जा रहा है। खुद दीप्ति ने संदीप को बताया कि उसे मारापीटा जाने लगा है। चूंकि संदीप के दोस्त व उनकी पत्नी की मौत हो चुकी थी और खुद वे इस शादी के बिचौलिया थे। इसलिए उन्होंने दीप्ति को अपनी बेटी की तरह मानते हुए इस विवाद में दखल देना शुरू कर दिया।
समझाने पर भी जब बात नहीं बनी तो संदीप खुद दीप्ति को अपने संग अलीगंज ले गए। वहां ले जाकर दीप्ति की ओर से दहेज उत्पीड़न सहित अन्य गंभीर धाराओं का मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसमें खुद अंकुश, उसके पिता, बहन बहनोई व एक रिश्तेदार आदि को नामजद किया गया। इस मुकदमे में अलीगंज पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलीगढ़ दबिश देना शुरू किया तो यह ससुराल पक्ष के लोग इधर उधर मदद में हाथ पैर मारने लगे। हर जगह से एक ही जवाब मिला कि इस मसले में जो संदीप तय करेंगे, वही होगा।
पिंका की मदद से ऐसे निपटने की राह पर बढ़ा विवाद
जांच में उजागर हुआ कि राजीव व अंकुश को जब संदीप व पिंका के रिश्तों की खबर लगी तो राजीव ने पिंका से मदद मांगी। इस पर पिंका ने दखल देकर दोनों पक्षों में सुलह की बात शुरू की और पिंका के घर पर बैठकर सुलह पर अंतिम मुहर लगी। सुलह की शर्त के अनुसार तय हुआ कि अंकुश पक्ष दीप्ति को 90 लाख रुपये देगा। जिसमें 45 लाख रुपये उसी समय और शेष 45 लाख रुपये अलीगंज में लिखा गया मुकदमा पुलिस स्तर से खत्म (अंतिम रिपोर्ट लगाने) किए जाने और अदालत में अंतिम रिपोर्ट स्वीकार हो जाने के बाद दिया जाएगा। इस पर मौके पर 20 लाख रुपये राजीव ने संदीप को दिए और शेष 25 लाख रुपये दीप्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद राजीव व अंकुश लगातार जल्द से जल्द मुकदमा खत्म कराने का दबाव बना रहे थे, जबकि संदीप कह रहे थे कि कानूनी प्रक्रिया है, खत्म करा दिया जाएगा, आप लोग परेशान न हों।
व्यापार-समाज में बेइज्जती ने किया आग ने घी का काम
पूछताछ में राजीव ने स्वीकारा कि हमारे पास 40 ट्रक हुआ करते थे और सभी ट्रक संदीप के लॉजिस्टिक व सीमेंट कारोबार में लगे थे। चूंकि कासिमपुर की सीमेंट कंपनियों के दोनों ठेके संदीप के पास ही थे। इसलिए हमने अपने ट्रक उन्हीं के पास लगा रखे थे। खुद संदीप की कंपनी पर भी 100 से ज्यादा ट्रक हैं। बाकी ट्रक वे हम जैसे ट्रांसपोर्टरों से भाड़े पर लेते थे। मगर दीप्ति व अंकुश के अलग होने के बाद उन्होंने हमारे सभी ट्रक इस कारोबार से हटा दिए। एकाएक ट्रक हटने से व्यापार पर असर पड़ा तो बैंक ऋण आदि देने तक के लाले पड़ने लगे। इसके चलते कुछ ट्रक बेचने पड़े। इससे समाज में तमाम तरह की बेइज्जती झेलनी पड़ी।
इधर, पिंका के घर समझौता बैठक के दिन खुद संदीप ने अंकुश को थप्पड़ों से पीट दिया था और यहां तक कहा था कि जब तक यह मुझसे पैर छूकर माफी नहीं मांगेगा, इसे माफ नहीं करुंगा। इस पर खुद राजीव ने यह कहते हुए एतराज जताया था कि एक तरफ तुम इसे दामाद मानते हो, फिर दामाद हमारे समाज में कहीं ससुर के पैर छूते हैं। यह तो पाप है। खैर उस समय किसी तरह बात निपटी, मगर इस बेइज्जती को राजीव से ज्यादा अंकुश ने दिल पर लिया और उसने संदीप को सबक सिखाने की बात ठानी।
दिखाने को परिवार से अलग हुआ, करने लगा तैयारी
पुलिस के अनुसार, अंकुश राजीव की पहली पत्नी की संतान है। उसकी एक विवाहित बहन भी है। पहली पत्नी की मौत के बाद उसने दूसरी शादी की, जिससे भी बेटा है। इस घटना के बाद अंकुश व राजीव ने साजिश के तहत बेदखली तैयार की, जिसमें दिखाया कि राजीव ने अंकुश को खुद से व्यापार में अलग कर दिया है। उसे आठ ट्रक दे दिए हैं, जबकि खुद राजीव वर्तमान में 26 ट्रक चला रहा है। बेदखली तैयार कर पुलिस प्रशासन में दे दी गई और अंकुश अपने दोस्त दुष्यंत चौधरी के पास रामघाट रोड शंकर विहार के पास रहने लगा। मगर अंदरखाने दोनों के मन में पाप पल रहा था।
ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों में खुद राजीव यह बात कहता था कि वह संदीप को एक दिन ठिकाने लगवाएगा। मगर उससे पहले उसके बेटे यानि संदीप के रिश्ते के दामाद ने दोस्तों संग साजिश रचकर अपनी व पिता की बेइज्जती का बदला ले लिया। अंदरखाने पिता-पुत्र इस प्लानिंग के लिए तैयारी कर रहे थे और बेटे ने पिता को जानकारी भी दे रखी थी।