अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में यमुना खादर के गांव किशनपुर में आठ वर्षीय बालिका की हत्या किसी गैर ने नहीं, बल्कि उसके दादा-दादी ने की थी। यह खुलासा शुक्रवार को पुलिस ने करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। अपने सबसे छोटे बेटे पर दर्ज दुष्कर्म की कोशिश के मुकदमे में समझौते का दबाव बनाने और विरोधी पक्ष को फंसाने के इरादे से इस हत्या को अंजाम दिया गया था। मगर, दादा-दादी को नहीं पता था कि वे कुछ ऐसे सुराग घटनास्थल पर छोड़ गए हैं, जिनके जरिये पुलिस उन तक पहुंच जाएगी। पूछताछ में दोनों टूट गए और मृतका के पिता के सामने हत्या की बात कबूल की।
रूबी हत्याकांड: दादा-दादी ने ही की थी मासूम बच्ची की हत्या, सच जानकर पुलिस समेत सबलोग हैरान
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बेटे के करियर की चाह ने बनाया कातिल
पुलिस पूछताछ में खुद दादा-दादी ने बताया कि दो माह पहले उनका छोटा बेटा ओमप्रकाश जेल से छूटकर आ गया तो उसको कहीं काम नहीं मिल पा रहा था। इसी बीच सामने वाला पक्ष समझौते पर भी तैयार नहीं हो रहा था। इन्हीं बातों को सोचकर दादा-दादी ने उन्हें झूठी घटना में फंसाने का प्लान बनाया। उन्हें लगा कि ऐसा कुछ करेंगे, जिससे विपक्षी फंस जाएगा और हमारे बेटे का करियर संवर जाएगा। इसी योजना के तहत कई माह से स्कूल नहीं जा रही नातिन को जबरन तैयार कराकर घटना वाले दिन स्कूल भेजा गया। वह जाते समय दादी से झगड़ा कर बिना मर्जी के निकली थी। दादी से तू तड़ाक में बात कर टॉफी आदि के लिए रुपये मांगे थे। मगर दादी ने इनकार कर दिया था। चूंकि वह उस दिन अकेली अचानक स्कूल के लिए गई। तो कोई अन्य बच्चा भी साथ नहीं था। उसके दादा दादी को ही उसके पीछे जाते हुए लोगों ने देखा था। यही बात पूछताछ में सामने आई कि बच्ची इतने दिनों बाद अचानक स्कूल गई और उसी दिन घटना कैसे हो गई। इसी बिंदु पर पुलिस का माथा ठनका और परिवार के इर्द-गिर्द शक की सुई घूमने लगी।
बेटे के सामने पुलिस ने कराया सच से सामना
पुलिस के सामने जब बच्ची के दादा-दादी ने हत्या की बात स्वीकार ली तो मृत बच्ची रूबी के पिता से उनका सामना कराया गया। इस पर दोनों ने बिलखते हुए हत्या करने की बात स्वीकार कर ली और कहा कि पता नहीं था कि हम ही फंस जाएंगे। उन्होंने बताया कि 11 बजे के करीब वो खुद बच्ची का स्कूल बैग व चप्पल लेकर घर पहुंचे और अनजान बनते हुए बहू से पूछा कि ये रास्ते में मिला है। फिर वापस दादा बच्ची को देखने के लिए स्कूल पहुंचे। वहां उनसे कहा गया कि बच्ची यहां नहीं आई है। इसके बाद लौटते समय दादी ने शव को उसी खेत से खोज निकालने का नाटक किया जिसमें उन्होंने खुद उसे फेंका था।
कचहरी के खर्च से भी तंग आ गए थे दोनों
दोनों ने पूछताछ में यह भी बताया कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर में भी उनका काफी पैसा खर्चा हो गया था। वहीं, मृत बच्ची के एक भाई का भी लंबे समय से इलाज चल रहा था। ऐसे में घर के खर्च में दिक्कत आने और कोर्ट कचहरी में और खर्चा न करना पड़े इसके चलते यह साजिश रची थी।
माहौल समझने के बाद एसपी देहात ने किया काम
एसपी देहात ने बताया कि जब 2019 में टप्पल में बच्ची की हत्या हुई थी। उस समय वे जिले में एएसपी थे। उस समय के घटनाक्रम से परिचित होने के कारण, इस घटना के बाद उन्होंने पहले माहौल समझा। फिर जब तथ्य उजागर होते चले गए तो खुलासा करने में मदद मिल गई।