जम्मू कश्मीर के अखनूर में बस हादसे में शिवखोड़ी जा रहे 11 तीर्थयात्रियों के शव शनिवार की देर शाम गांव नाया पहुंचते ही हर तरफ करुण कंद्रन मच गया। अपनों के शव देखकर परिजन बिलख पड़े। महिलाओं का रोकर बुरा हाल था। कुछ महिलाएं गश खाकर धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ीं। बच्चे भी बिलख रहे थे। कोई किसी को संभालने की कोशिश करता तो खुद ही दहाड़ मारकर रो पड़ता।
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Jammu akhnoor bus accident
- फोटो : अमर उजाला
रात आठ बजकर 48 मिनट पर संजय पुत्र सुंदर सिंह की चिता को सबसे पहले उनके बेटे आदित्य ने मुखाग्नि दी। इसके बाद करीब सवा नौ बजे तक सभी 11 शवों को उनके परिजन की ओर से मुखाग्नि दे दी गई थी। एक ओर चिताएं जल रही थीं, दूसरी ओर मासूम बच्चों और बूढ़े माता-पिता के अरमान भी चिता की लपटों सहित जले जा रहे थे।
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सुनीता का शव घर पहुंचा तो हादसे के समय बस में उनके साथ मौजूद रहे बुरी तरह से घायल दामाद सुभाष निवासी रामपुर उमरी जिला मथुरा और धेवते राज कुंतल की आंखों से भी आंसुओं का सैलाब बह चला। संजय के घर पर उनकी मां केला देवी का बुरा हाल था।
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उनके मासूम बेटे आदित्य (10) और ईशान (8) का भी रोकर बुरा हाल था। सोनू उर्फ अंजली की बूढ़ी मां अपनी बेटी के शव को देखकर बिलखते हुए कभी जमीन पर गिर पड़ती तो कभी दहाड़ मारकर रोने लगती। अंजली का मासूम बेटा शनिवार को शाम से ही घर पर अपनी नानी की गोद में सहमा बैठा था। उसने भी जब अपनी मां के शव को देखा तो अपने आंसुओं की धारा रोक नहीं सका।
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यही हाल लक्ष्मण प्रसाद शर्मा और सुरेश के परिवार वालों का भी था। लक्ष्मण प्रसाद शर्मा सहित उनका पूरा परिवार इस हादसे की भेंट चढ़ चुका है। उनके भाई-भतीजों सहित परिवार की महिलाएं बार-बार चारों के शव देखतीं और चीखतीं-चिल्लातीं।