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World Elephant Day: यमुना किनारे हाथियों का बसेरा, संरक्षण केंद्र में आजाद जिंदगी जी रहे 'गजराज'

Tue, 11 Aug 2020 03:51 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 11 Aug 2020 03:51 PM IST
सार

2018 में स्थापित हुआ हाथी अस्पताल 

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World Elephant Day: Special Story Of Elephant Conservation and Care   Center Mathura
हाथी संरक्षण केंद्र में हाथी - फोटो : अमर उजाला
यमुना किनारे हाथियों का आवास। जी हां, फरह क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-दो से दो किलोमीटर दूर गांव चुरमुरा में 2010 में स्थापित हाथी संरक्षण केंद्र में वर्तमान में 24 हाथी हैं। हाथियों के रहने से लेकर इलाज और मृत्यु के बाद स्मारक तक यहां बने हैं। अब तक पांच हाथियों की मौत हो चुकी है। दिल्ली निवासी संरक्षक कार्तिक सत्यनारायण और नोएडा निवासी डायरेक्टर बैजू राज के नेतृत्व में हाथियों की देखभाल की जाती है। कई सिने स्टार भी यहां आ चुके हैं। पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रख्यात मेनका गांधी ने भी केंद्र के संचालन में काफी मदद की है। 


World Elephant Day: Special Story Of Elephant Conservation and Care   Center Mathura
हाथी संरक्षण केंद्र में हाथी - फोटो : अमर उजाला
हाथियों के संरक्षण के लिए गांव चुरमुरा में स्थापित हाथी संरक्षण केंद्र में देशभर से ऐसे हाथी लाए जाते हैं जो बीमार अथवा बंधन से छूड़ाए गए हैं। अब तक 29 हाथी संरक्षण केंद्र में लाए गए, जिनमें से पांच ही मौत हो चुकी है। पांचों के स्मारक केंद्र में बनाए गए हैं।
 
World Elephant Day: Special Story Of Elephant Conservation and Care   Center Mathura
हाथी संरक्षण केंद्र में राजू - फोटो : Wildlife SOS
वर्ष 2018 में केंद्र में हाथी अस्पताल स्थापित किया गया, जहां बीमार तथा जख्मी हाथियों का इलाज किया जाता है। वर्ष 2014 में भिक्षाटन करने वालों से राजू नाम के हाथी को मुक्त किया गया था। उसे इस केंद्र पर लाया गया। वह 50 साल तक जंजीरों में कैद रहा था। हाथी की हालत को देखकर हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।
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हाथी संरक्षण केंद्र में राजू - फोटो : WildlifeSOS
राजू का मालिक भीख मांगने के लिए उसे प्रयागराज की सड़कों पर घुमाता था। हाथियों के बचाव और पुनर्वास के लिए काम करने वाले एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस ने राजू को मुक्त कराया था। केंद्र की ख्याति के चलते सिने स्टार भी यहां आते रहते हैं। पिया अलबेला फिल्म के हीरो तुषार खन्ना यहां घूमने आए और केंद्र पर आधारित फिल्म बनाने पर विचार किया था। 
 
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हाथी संरक्षण केंद्र
जीव-जंतुओं की सेवा भी कर रहा केंद्र
हाथी संरक्षण केंद्र में हाथियों के साथ अन्य जीव-जंतुओं की भी सेवा की जाती है। हालांकि उन्हें यहां रखा नहीं जाता बल्कि सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया जाता है। पिछले दिनों एक जख्मी मगरमच्छ को केंद्र पर लाया गया था। यहां इलाज के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया। इसी तरह सांप, अजगर अथवा अन्य जीव-जंतुओं की भी यहां सेवा होती है। 
 
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