यूपी में स्वास्थ्य विभाग भले ही बेहतर सुविधाएं देने के दावा करता हो लेकिन मानवीय संवेदना को तार-तार करने का एक और उदाहरण फिरोजाबाद के जिला महिला अस्पताल में रविवार को देखा गया। यहां 102 एंबुलेंस के देरी से पहुंचने के कारण प्रसूता ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
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एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद महिला अस्पताल की इमरजेंसी तक जाने के लिए प्रसूता को स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं कराया गया। बच्चे को जन्म देने के बाद गंभीर हालत में महिला खुद पैदल चलकर इमरजेंसी तक पहुंची। अस्पताल का स्टाफ खड़ा होकर तमाशा देखता रहा।
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बताया गया है कि फिरोजाबाद के गांव तोलतपुर निवासी रामवती पत्नी मनीष कुमार को रविवार की दोपहर प्रसव पीड़ा हुई। गांव की आशा ने 102 एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस आधा घंटे देरी से पहुंची। एंबुलेंस से प्रसूता को जिला महिला अस्पताल लाया जा रहा था कि रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया।
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एंबुलेंस
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जिला महिला अस्पताल पहुंचने के बाद आशा ने इमरजेंसी में तैनात स्टाफ नर्स को सूचित किया लेकिन 10 से 15 मिनट बाद स्टाफ बाहर निकल कर आया। इसके बाद एंबुलेंस चालक और स्टाफ में बहस होने लगी कि प्रसूता को इमरजेंसी में कौन लाए।
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एंबुलेंस चालक ने एंबुलेंस की स्ट्रेचर टूटी होने की बात कही। इस बाद भी जिला महिला अस्पताल से स्ट्रेचर मुहैया नहीं कराई। प्रसव के तुरंत बाद ही रक्त स्राव होने के बावजूद महिला एंबुलेंस से उतर कर पैदल ही महिला अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष तक की दूरी तय की।