आगरा के यमुनापार इलाके में मंगलवार को छह घंटे तक तेंदुए की दहशत रही। एत्माद्दौला स्थित सीता नगर की जाट वाली गली में सुबह 6:30 बजे तेंदुए को देखा गया। तेंदुए ने एक घर में युवक पर हमला कर दिया। लोगों के शोर के बीच तेंदुआ फलों के गोदाम में घुस गया, जिसके बाद लोगों ने गेट बंद कर दिया। दोपहर में वन विभाग की टीम और एक्सपर्ट ने तेंदुए को बेहोश कर दिया और पिंजरे में बंद कर कीठम स्थित वन्यजीव अस्पताल ले गए। इस तेंदुए को शिवालिक रेंज के जंगलों में छोड़ने की तैयारी है।
मंगलवार सुबह सीता नगर की जाट वाली गली में रहने वाले सुमित सोलंकी के घर का गेट खुला होने से तेंदुआ घर के कमरे में छिप गया। सुमित सोलंकी कमरे में गए तो तेंदुए ने उन पर हमला बोला। उनके पैरों पर पंजा मारा, जिससे वह जख्मी हो गए। शोर मचाने पर तेंदुआ बाहर भागा और फलों के गोदाम में घुस गया। इसी गेट पर आठ साल की बच्ची यशस्वी बैठी थी, जो तेंदुए के हमले से बाल-बाल बची। तेंदुआ दिखने की खबर लगते ही आसपास के क्षेत्रों के लोग सीता नगर पहुंच गए। सूचना देने के बाद वन विभाग की टीम पहुंची।
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आगरा: पिंजड़े में बंद तेंदुआ
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बेहोश कर पिंजरे में डाल कर निकाला
सुबह वन विभाग की टीम पहुंची तो पहले पकड़ने पर विचार हुआ, लेकिन हजारों लोगों की मौजूदगी में तेंदुए के भागने और भगदड़ मचने का खतरा था। ऐसे में वन्य जीव विभाग से अनुमति ली गई कि तेंदुए को बेहोश किया जाए और पिंजरे में डाल कर निकाला जाए। वाइल्ड लाइफ एसओएस के एक्सपर्ट ने ट्रैंक्युलाइजर गन से तेंदुए के वजन के मुताबिक दवा लेकर उसे बेहोश किया। इसके लिए गोदाम की दीवार में सेफ्टी होल तैयार कर कैमरा लगाया गया। बेहोश करने के बाद पिंजरे में उसे कीठम स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां स्वास्थ्य की जांच की गई।
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आगरा: इलाके में छह घंटे तक रही तेंदुए की दहशत
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तीन दिन पहले मचा था तेंदुआ दिखने का शोर
तीन दिन पहले यमुनापार ही मोतीमहल, यमुना ब्रिज स्टेशन और महताब बाग के पास तेंदुआ दिखने का शोर मचा था, तब वन विभाग की टीम ने पंजों के निशान चेक किए तो इन्हें लकड़बग्घे के पैरों के निशान बताए। मंगलवार को तेंदुआ सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुआ, तब लोगों को यकीन हो पाया। फल गोदाम में तेंदुए को पकड़ने वालों में वाइल्ड लाइफ एसओएस टीम के अलावा 5 एफ इको फाउंडेशन के विपिन कपूर, सौरभ राना, कोबरा एनजीओ के अंशुल दीप मौजूद रहे।
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ट्रैंक्युलाइजर गन से तेंदुए को किया गया बेहोश
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वाइल्ड लाइफ एसओएस के उपनिदेशक डॉ. इलियाराजा ने बताया कि लोगों की सुरक्षा यहां महत्वपूर्ण थी, इसलिए सावधानी से योजना बनाई गई। यह 8 साल का नर तेंदुआ है। फिलहाल कीठम के अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। वह ठीक है। बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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आगरा: पिंजड़े में तेंदुआ
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डीएफओ अखिलेश पांडे ने कहा कि घनी आबादी में होने के कारण लोगों पर हमले का डर था। अगर गोदाम की जगह तेंदुआ आगे निकल जाता तो पकड़ना मुश्किल हो जाता। बेहोश कर उसे पकड़ लिया गया। वह स्वस्थ है और शिवालिक के जंगलों में छोड़ने की अनुमति मांगी है।