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मध्यप्रदेश-राजस्थान की बारिश से उफनाई चंबल: आगरा के 38 गांवों में बाढ़ का खतरा, देखें तस्वीरें

Thu, 29 Jul 2021 10:29 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 29 Jul 2021 10:29 AM IST
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Water Lavel Of Chambal River Increased After Rain Up And Mp
चंबल नदी में बढ़ता पानी - फोटो : अमर उजाला

मध्यप्रदेश और राजस्थान में लगातार हो रही बारिश के कारण चंबल नदी उफान पर है। 24 घंटे में नदी का जलस्तर 36 फुट बढ़कर 112 मीटर से 121 मीटर पहुंच गया। प्रति घंटे डेढ़ फुट की दर से पानी बढ़ने से बाह तहसील के 36 गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने इन गांवों में अलर्ट भी जारी कर दिया है। लेखपालों को गांवों में ही रुकने और जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम बाह अब्दुल बासित ने बुधवार को पिनाहट, उमरैठा पुरा, बीच का पुरा और तहसीलदार बाह राजू कुमार को गोहरा गांव जाकर स्थिति देखी। ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने और ऊंचाई वाले इलाकों में रहने के निर्देश दिए। पिनाहट में स्टीमर और विभिन्न घाटों पर नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल खतरे के निशान 130 मीटर से 9 मीटर नीचे चंबल नदी से डगौरा, रेहा, बरेंडा, बीच का पुरा, क्योरी, उमरैठापुरा, डालपुरा, शिवलालपुरा, झरनापुरा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, भगवानपुरा, मऊ की मढै़या आदि गांवों के लोग परेशान हैं।     

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चंबल नदी के पुल पर पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
आठ बाढ़ चौकियां गठित

चंबल के उफान से प्रभावित लोगों को विस्थापित करने के लिए आठ बाढ़ चौकियां  मनसुखपुरा, पिनाहट, उमरैठा, बासौनी, सिमराई, पुरा भगवान, खेड़ा राठौर, नंदगवां में गठित की गई हैं। एसडीएम ने बताया कि जरूरत पड़ने पर इन चौकियों पर तटीय 38 गांवों के लोगों को विस्थापित किया जाएगा। चौकियां बनाने के लिए गांव के परिषदीय स्कूलों का अधिग्रहण किया गया है। इसके अलावा तहसील मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। जो 24 घंटे काम करेगा।                                  

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चंबल का पानी - फोटो : अमर उजाला
 कछार की फसलें डूबी, बही किनारे की झोपड़ियां

उफनाई चंबल नदी के पानी से कछार की फसलें डूब गई हैं। फसलों की रखवाली के लिए बनाई गई कई झोपड़ियां भी बह गईं। नदी किनारे के गुढ़ा, मऊ की मढै़या, भटपुरा, उमरैठा पुरा, डालपुरा, मुकुटपुरा, भगवानपुरा, धांधूपुरा, रानी पुरा आदि गांवों के किसानों ने कछार में सब्जी के अलावा बाजरा आदि की फसलें बोई थीं। ये फसलें डूब गई हैं। किसान वीरेंद्र सिंह, विजेंद्र सिंह, राकेश कुमार, गोलई आदि ने बताया कि खेतों में पानी भरने से काफी नुकसान हुआ है। पशुओं के चारे का भी संकट हो सकता है।                                   

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चंबल नदी में बढ़ा पानी का स्तर - फोटो : अमर उजाला

बीहड़ से पशु लेकर भागे चरवाहे 
बुधवार की दोपहर चंबल नदी के उफान के साथ ही चरवाहों ने भी बीहड़ छोड़ दिया है। खेड़ा राठौर, महुआशाला, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढै़या, कैंजरा, उमरैठा पुरा ,बासौनी, जेबरा, कुंवरखेड़ा आदि गांवों के चरवाहे अपने पशु लेकर गांव की ओर भागने को मजबूर हो गए। राकेश यादव ने बताया कि चंबल नदी तेजी के साथ बढ़ती है। पिछले साल कई चरवाहे बीहड़ में फंस गए थे।

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चंबल नदी का पानी - फोटो : अमर उजाला
हालांकि गुरुवार की सुबह चंबल के निकट के गांवों के लिए राहतभरी रही। गुरुवार को चंबल नदी का जलस्तर स्थिर हुआ। बुधवार को 121.60 मीटर पहुंचने के बाद 121.30 पर रुक गया। जिससे कुछ राहत मिली। लेकिन एहितायत के तौर पर ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है।
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