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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूर की संतों की नाराजगी, कहा, प्रयागराज से बेहतर होगा वृंदावन कुंभ
Wed, 04 Mar 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:06 AM IST
सार
मुख्यमंत्री बोले दिल्ली यमुना को गंदा करना बंद करे तो होगी यमुना निर्मल
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन के बरसाना रंगोत्सव में शामिल होने के बाद वृंदावन में संतों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने वृंदावन कुंभ के नाम परिवर्तन को लेकर चल रही संतों की नाराजगी दूर कर दी। उन्होंने कहा कि वृंदावन कुंभ का नाम वृंदावन कुंभ ही होगा संत समागम नहीं। वह वृंदावन के प्रमुख संतों के साथ टूरिस्ट फेसिलेशन सेंटर में वार्ता कर रहे थे। इस बैठक में कुल मिलाकर 45 संतों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने एक-एक करके संतों के सभी प्रश्नों के उत्तर शांत भाव से दिए।
बरसाना में पूजा अर्चना करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
बता दें वृंदावन में आयोजित होने वाले कुंभ का नाम सरकार द्वारा संत समागम किया जा रहा था। इसे लेकर प्रशासन ने कई जगह विज्ञापन आदि भी किया था। जब मुख्यमंत्री ने संतों के साथ वार्ता की तो प्रमुख संतों ने सबसे पहले यही मुद्दा उठाया। जिस पर मुख्यमंत्री ने उनसे सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने बैठक में संतों को बताया कि वृंदावन का कुंभ प्रयागराज से भी भव्य दिव्य कुंभ होगा। जिसके लिए शासन-प्रशासन अभी से जुट गया है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने वार्ता में बताया कि कुंभ को लेकर संत निश्चिंत रहे। उसकी व्यवस्थाओं की तैयारियां अभी से कर ली गई हैं। इसी क्रम में संतों ने जब यमुना को शुद्ध करने संबंधी प्रश्न मुख्यमंत्री से किया तो मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि जब तक दिल्ली द्वारा यमुना को गंदा किया जाता रहेगा यहां पर यमुनाजल शुद्ध नहीं मिल सकता है। दिल्ली द्वारा यमुना में नाले मिलाए जाते हैं जिसके चलते जब यमुना का पानी मथुरा में आता है तो गंदा होता है। इस पर संतों ने सहमति जताई। इस वार्ता के दौरान सभी प्रमुख संतों मौजूद रहे। जिनमें फनूलडोल महाराज, बाबा जयराम दास, स्वामी रामदेवानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी रामस्वरूप दास, तमाल कृष्ण दास, गोपी कृष्ण दास, मोहिनी शरण दास, बलराम दास, नागा हरिशंकर दास, लाडली दास, गोपी कृष्ण दास, ब्रज बिहारी दास, विश्म्भर दास, वृंदावन दास, सुतीक्षण दास, सच्चिदानंद दास, राम प्रवेश दास, सनत कुमार दास, अम्बिका दास,
स्वामी धराचार्य, किशोरीशरण, स्वामी रघुनाथ, बंशीवट वाले बाबा आदि मुख्य थे।
स्वामी धराचार्य, किशोरीशरण, स्वामी रघुनाथ, बंशीवट वाले बाबा आदि मुख्य थे।
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लोकार्पण करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
सतों ने जब मुख्यमंत्री से सीधे-सीधे वृंदावन के आश्रमों पर हो रहे अवैध कब्जे के लेकर चिंता जताई और कहा कि इसे लेकर वृंदावन के संत आश्रम परंपरा खतरे में है तो मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर समाधान की मुद्रा में आ गए और बोले कि संतों के आश्रमों को बचाने के लिए सरकार एक विधेयक लाएगी और कानून तैयार किया जाएगा। जिसमें किसी भी आश्रम के बेचने पर प्रतिबंध होगा। कोई माफिया उस पर कब्जा करके या फिर उसे किसी भी प्रकार से खुर्द-बुर्द नहीं कर सकेगा। केवल आश्रम का संचालन ही होगा। आश्रम के संचालक के न होने पर आश्रम फिर सरकार का होगा। किसी भी स्थिति में आश्रम माफिया के हाथों में नहीं जाएगा। बैठक में इस मुद्दे पर फूल डोल दास जी महाराज,स्वामी रामदेवानंद सरस्वती जी ने मुख्यमंत्री से बातचीत की । संत द्वय ने बताया कि वह इस मुद्दे पर और भी मुखर होकर प्रयास करेंगे और विधेयक लाने के लिए सरकार से प्रयासरत रहेंगे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
बैठक में प्रमुख संतों ने सप्त देवालयों को संरक्षित करने की मांग भी उठाई। संतों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मुगल शासन काल में मदन मोहन देव जी मंदिर तथा अन्य कई मंदिरों को मुगल शासकों ने तोड़ने का प्रयास किया। किसी प्रकार से हिंदू संतों ने इन मंदिरों की रक्षा की परंतु आज यह अपनी ही सरकार में संरक्षित नहीं हो पा रहे हैं। यह सप्त देवालय दिनों दिन क्षीण हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि सप्त देवायलों के साथ सरकार अन्य प्रमुख स्थलों को भी संरक्षित करे।