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भ्रष्टाचार के अंधेरे में डूबा ग्रामीणों का 'सौभाग्य', मीटर मिले, बिजली कनेक्शन नहीं
Tue, 11 Jun 2019 04:06 PM IST
मुकेश कुमार
राजीव शर्मा, अमर उजाला, आगरा
राजीव शर्मा, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 11 Jun 2019 04:06 PM IST
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घर के बाहर लगा बिजली का मीटर
- फोटो : अमर उजाला
सौभाग्य योजना के तहत हर घर को रोशन करने के नाम पर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने ग्रामीणों के साथ मजाक किया है। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार की वाहवाही लूटने के लिए घरों के बाहर मीटर तो लगा दिए, लेकिन बिजली कनेक्शन अब तक नहीं दिया है। खंभों पर केबल कम, कटिया ज्यादा नजर आती हैं। जहां केबल है भी, वो अधूरी छोड़ दी है। मेन लाइन से जुड़ी न होने पर इसमें करंट ही नहीं है। ऐसे ही कुछ हाल है खंदौली ब्लॉक के कई गांवों का, जहां लोग अभी भी कटिया डालने को मजबूर हैं।
घर के बाहर लगा बिजली का मीटर
- फोटो : अमर उजाला
खंदौली ब्लॉक के उजरई गांव में 46 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में भी ग्रामीण हाथ का पंखा झलने को मजबूर हैं। गांवों में बिजली आपूर्ति को लेकर उनके साथ छलावा हुआ है। केबल डालकर खंभे खड़े कर दिए गए हैं लेकिन लोगों को कनेक्शन नहीं दिए गए। घर के बाहर लगा बिजली मीटर मुंह चिढ़ा रहा है। गांव की गलियों में कटिया का जाल बिछा हुआ है। ऐसी स्थिति में आए दिन फॉल्ट होते रहते हैं। घंटों के लिए बिजली गुल जाती है।
गांव पैंतखेड़ा में बिजली के इस खंभे तक लाइन छोड़ दी गई
- फोटो : अमर उजाला
दक्षिणांचल खंदौली से लगे पैंत खेड़ा को सौभाग्यशाली घोषित कर चुका है। यानी यहां के हर घर में बिजली कनेक्शन है। मगर, हकीकत से परे है। गांव के बाहर इच्छुक व्यक्तियों को बिजली कनेक्शन देने के दावे के साथ ही सरकारी बोर्ड भी लगा दिया गया है ताकि कोई वरिष्ठ अधिकारी या मंत्री आएं तो गांव में पूर्ण रूप से बिजली कार्य होने का अहसास हो।
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गांव पैंतखेड़ा में बिजली के इस खंभे से आगे लाइन नहीं
- फोटो : अमर उजाला
पैंत खेड़ा गांव के अधिकांश खंभों पर केबल अधूरी छूटी है। उसके दोनों सिरे कटे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मीटर एक ठेकेदार के कर्मचारी लगाने आए थे लेकिन इसके बाद किसी ने पलटकर नहीं देखा। यानी मीटर लगाने के नाम पर घोटाला कर दिया गया। कनेक्शन के लिए जो केबल देनी थी, उसका भी अता-पता नहीं है।
दक्षिणांचल ने सौभाग्य योजना के तहत किए जाने वाले कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराए। उन्होंने घरों के बाहर मीटर लगाकर इसका फोटो खींचकर दक्षिणांचल के अधिकारियों को भेज दिया ताकि यह सुनिश्चित हो जाए कि मीटर लग गए। कनेक्शन हुए कि नहीं, इसकी पड़ताल ही नहीं कराई।
दक्षिणांचल ने सौभाग्य योजना के तहत किए जाने वाले कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराए। उन्होंने घरों के बाहर मीटर लगाकर इसका फोटो खींचकर दक्षिणांचल के अधिकारियों को भेज दिया ताकि यह सुनिश्चित हो जाए कि मीटर लग गए। कनेक्शन हुए कि नहीं, इसकी पड़ताल ही नहीं कराई।
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घर के बाहर लगा बिजली का मीटर
- फोटो : अमर उजाला
दक्षिणांचल ने बिना पड़ताल किए ही पूरे जिले को नवंबर 2018 में ही सौभाग्यशाली घोषित कर दिया था। जबकि स्थिति यह है कि कई गांवों में खंभे तक नहीं लगे हैं। बता दें कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति करता है, शहर की व्यवस्था टोरंट पॉवर के हाथों में हैं।