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वैकुंठ चतुर्दशीः भगवान विष्णु को शिव ने दिया था सुदर्शन चक्र, महालक्ष्मी की कृपा के लिए जानिए कैसे मनाएं चतुर्दशी

Sat, 28 Nov 2020 12:05 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 28 Nov 2020 12:05 AM IST
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Vaikuntha Chaturdashi 2020: Shubh Muhurat Timing And Religious   Significance
भगवान विष्णु
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जानी जाती है। नरकचतुर्दशी की तरह वैकुंठ चतुर्दशी का भी अपना अलग ही महत्व है। जिस प्रकार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यमराज की प्रसन्नता के लिए दीपदान किया जाता है। वैसे ही शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठाधिपति भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए दीपदान करते हैं। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा की जाती है।    
Vaikuntha Chaturdashi 2020: Shubh Muhurat Timing And Religious   Significance
lord vishnu
वैदिक शोध निदेशक, भारद्वाज ज्योतिष व आध्यात्मिक शोध संस्थान इंदौर के आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा ने बताया कि कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी अरुणोदय व्यापिनी ग्रहण करने का शास्त्र आदेश है। जिस दिन अरुणोदय काल में चतुदर्शी तिथि हो उस दिन यह पर्व मनाना चाहिए। शनिवार को चतुदर्शी तिथि प्रातः 10 बजकर 21 मिनिट से प्रारंभ होगी जो दूसरे दिन रविवार को दोपहर 12.47 बजे तक रहेगी। धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार वैकुंठ चतुर्दशी 29 नवंबर, रविवार को मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।     
 
Vaikuntha Chaturdashi 2020: Shubh Muhurat Timing And Religious   Significance
lord vishnu - फोटो : lord vishnu
चतुर्दशी कैसे मनाएं
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा ने बताया कि वैकुंठ चतुर्दशी को व्रत रखने का विधान है। सायंकाल विष्णु भगवान की कमल के फूलों से पूजा अर्चना व पवित्र नदी के किनारे दीपमालिका करने से महालक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है। विष्णु भगवान की पूजा के साथ ही भगवान शिव की भी पूजा-अभिषेक करने का विधान है। ये दिन हरिहर मिलन का दिन है। इस दिन भगवान शिव ने विष्णुजी को सुदर्शन चक्र भेंट किया था।      
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Vaikuntha Chaturdashi 2020: Shubh Muhurat Timing And Religious   Significance
lord vishnu (demo pic)
क्या है हरिहर मिलन की पुराण सम्मत कथा...
विष्णु भगवान महादेवजी की पूजा अर्चना के लिए काशी में पधारे, वहां उन्होंने एक हजार कमल पुष्पों से शिव अर्चना का संकल्प लिया। पूजा के बाद भगवान शिव ने विष्णु भगवान की भक्ति की परीक्षा लेने के उद्देश्य से एक हजार अर्चना पुष्पों में से एक कमल पुष्प कम कर दिया। भगवान विष्णु ने अपने संकल्प को पूरा करने के लिए एक कमल पुष्प के स्थान पर अपनी एक आंख चढ़ाने की तैयारी की ही थी कि भगवान विष्णु की इस अगाध श्रद्धा भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए।
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Vaikuntha Chaturdashi 2020: Shubh Muhurat Timing And Religious   Significance
Lord vishnu and Lord shiva
इसीलिए विष्णु भगवान को कमलनयन व पुंडरीकाक्ष भी कहा जाता है। इसी दिन से यह चतुर्दशी वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से प्रसिद्ध हुई। आज ही के दिन शिवजी ने आततायी राक्षसों के वध के लिए करोड़ों सूर्य के समान सुदर्शन चक्र विष्णु भगवान को भेंट किया। तीनों लोकों में इसके समान दूसरा कोई शस्त्र नहीं होगा।
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