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पड़ताल: चूहे-बिल्लियों की ये मजाल मिटा दिए 200 मौतों के 'साक्ष्य', विभागों की लापरवाही ने दिया मौका
Sat, 30 Nov 2019 12:12 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 30 Nov 2019 12:12 AM IST
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टूटे पड़े विसरा के जार
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में पुराने पोस्टमार्टम हाउस के जर्जर कमरे में रखे 2000 विसरा में से करीब 10 फीसदी यानि 200 नष्ट हो चुके हैं। इन जार के ढक्कन तक गलकर अलग हो गए हैं। इन विसरा के रिकार्ड का भी कुछ पता नहीं है। न स्वास्थ्य विभाग इनकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है न ही पुलिस। मौतों के रहस्य से पर्दा उठाने की कोई कोशिश ही नहीं की जा रही है।
इसी कमरे में रखे हैं विसरा के जार
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर से जर्जर कमरे में कैद विसरा की पड़ताल की। पीछे की तरफ से जंगला टूटा पड़ा मिला। इससे होकर बिल्ली, चूहे अंदर जा रहे हैं। यहां वर्ष 1990 से 2004 तक के विसरा रखे हैं लेकिन इनका कोई रजिस्टर नहीं है। इन्हें शव के पोस्टमार्टम के बाद विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाना था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।
कमरे का ताला टूटा हुआ
- फोटो : अमर उजाला
नए पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने बताया कि रिकार्ड वहीं (पुराने पोस्टमार्टम हाउस में) होगा। वहां कोई रजिस्टर नहीं है। कमरे का ताला टूटा हुआ है। इसके बाहर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने सोने के लिए बेंच डाल रखी है। उसने बताया कि छह महीने से यहां कोई आया ही नहीं है। बिल्ली, चूहे जार को गिरा देते हैं, इससे विसरा बाहर निकलकर नष्ट हुआ है।
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आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला
- फोटो : अमर उजाला
‘इतने पुराने विसरा में अल्कोहल परीक्षण नहीं हो पाएगा ’
विसरा के इतने लंबे समय पड़े रहने से कई राज की तो मौत हो गई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉ. एके मित्तल का कहना है कि अगर मौत जहर से हुई है तो विसरा चाहे कितना पुराना हो, परीक्षण से पता चल सकता है। अगर मौत शराब से हुई है तो पता नहीं चल पाएगा। विसरा में अल्कोहल की मात्रा कुछ दिन तक ही रहती है।
विसरा के इतने लंबे समय पड़े रहने से कई राज की तो मौत हो गई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉ. एके मित्तल का कहना है कि अगर मौत जहर से हुई है तो विसरा चाहे कितना पुराना हो, परीक्षण से पता चल सकता है। अगर मौत शराब से हुई है तो पता नहीं चल पाएगा। विसरा में अल्कोहल की मात्रा कुछ दिन तक ही रहती है।
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सीएमओ मुकेश वत्स
- फोटो : अमर उजाला
विसरा भेजना पुलिस की जिम्मेदारी - सीएमओ
सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखे विसरा से स्वास्थ्य विभाग का कोई मतलब नहीं है। इन्हें परीक्षण के लिए भेजना पुलिस की जिम्मेदारी है। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद का कहना है कि ये विसरा अज्ञात शवों के हो सकते हैं। अगर किसी की पहचान होती है और उनके परिवार से कोई जांच के लिए कहता है तो इनका परीक्षण कराया जाएगा।
सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखे विसरा से स्वास्थ्य विभाग का कोई मतलब नहीं है। इन्हें परीक्षण के लिए भेजना पुलिस की जिम्मेदारी है। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद का कहना है कि ये विसरा अज्ञात शवों के हो सकते हैं। अगर किसी की पहचान होती है और उनके परिवार से कोई जांच के लिए कहता है तो इनका परीक्षण कराया जाएगा।