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लॉकडाउन में आंखों देखी: हाईवे बना बिस्तर, ईंट तकिया, खुले आसमान के नीचे बीती काली रात
Mon, 30 Mar 2020 09:32 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 30 Mar 2020 09:32 AM IST
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सड़क किनारे सोते लोग
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के इंटरस्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) पर शनिवार रात को दो बजे भी दिन सा नजारा दिखा। 20 हजार से ज्यादा मजदूर सड़क पर भटक रहे थे। कोई 100 किमी पैदल चलकर आया तो कोई 200 किमी। घर अभी दूर था। बस पता नहीं कब आएगी, आंखों में नींद थी। जो बैठा, उसे ही झपकी लग गई। बिस्तर की जगह हाईवे था, ईंट तकिया बनी थी। खुले आसमान के नीचे इन मुसीबत के मारों की रात कटी मगर डरते-डरते। डर था बस छूट जाने का, इसलिए बीच-बीच में जागकर पड़ोस वाले से पूछते रहे, भैया हमारी बस तो नहीं आई। पुलिस और रोडवेज के लाउडस्पीकर बता रहे थे कि कहां के लिए कौन सी बस चलने वाली है? मजदूरों के कान इसी पर पर लगे थे।
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फुटपाथ के किनारे सोते लोग
- फोटो : अमर उजाला
इस भीड़ में बच्चे भी थे और महिलाएं भीं। चिंता सबकी एक थी, घर कैसे पहुंचेंगे। दिल्ली और हरियाणा से कोई कैंटर से आया, कोई ट्रक से। जहां तक वाहन मिले, वहां तक उसमें सवार हुए। बाकी पैदल चले। रास्ते में भोजन नहीं मिला, न सही, बहुत देर देर तक प्यासा रहना पड़ा, उसकी भी चिंता नहीं। बस चले जा रहे थे। आईएसबीटी पर आकर ठहर गए।
सड़क किनारे सोते लोग
- फोटो : अमर उजाला
गांव में गेहूं काटेंगे... पेट तो भरेगा
आईएसबीटी के ठीक सामने हाईवे के निर्माणाधीन फ्लाईओवर के बीच में लेटे संदीप ने बताया कि दिल्ली में बसें चल रही थीं, हमने सोचा कन्नौज के लिए भी मिल जाएंगी। यूपी बॉर्डर पर आए 100 रुपये में ट्रक वाला पूरे परिवार को मथुरा तक ले आया। वहां आकर पता चला कि यूपी में कोई बस नहीं चल रही, इसलिए वहां से पैदल आना पड़ा। अब गांव में पहुंचना है, वहां गेहूं की कटाई करेंगे, कम से कम खाना तो मिल ही जाएगा।
आईएसबीटी के ठीक सामने हाईवे के निर्माणाधीन फ्लाईओवर के बीच में लेटे संदीप ने बताया कि दिल्ली में बसें चल रही थीं, हमने सोचा कन्नौज के लिए भी मिल जाएंगी। यूपी बॉर्डर पर आए 100 रुपये में ट्रक वाला पूरे परिवार को मथुरा तक ले आया। वहां आकर पता चला कि यूपी में कोई बस नहीं चल रही, इसलिए वहां से पैदल आना पड़ा। अब गांव में पहुंचना है, वहां गेहूं की कटाई करेंगे, कम से कम खाना तो मिल ही जाएगा।
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लोगों को वाहनों से भेजती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
दूध के लिए बिलख रहे थे बच्चे... देखा नहीं गया
झांसी की रजनी का कहना था कि गुरुग्राम में पति बेलदारी करता है। लॉकडाउन होते ही पास की दूध की दुकान बंद हो गई। बच्चे छोटे हैं, उन्हें दूध नहीं मिल पा रहा था। सुबह से ही बिलखने लगते थे, तीन दिन तो सहन किया, अब देखा नहीं जा रहा था, इसलिए पैदल ही चल दिए। गाव पहुंच जाएंगे तो दूध तो मिल जाएगा। गुरुग्राम में भी मजदूरी कर रहे थे, झांसी में भी कोई न कोई काम तो मिल ही जाएगा।
झांसी की रजनी का कहना था कि गुरुग्राम में पति बेलदारी करता है। लॉकडाउन होते ही पास की दूध की दुकान बंद हो गई। बच्चे छोटे हैं, उन्हें दूध नहीं मिल पा रहा था। सुबह से ही बिलखने लगते थे, तीन दिन तो सहन किया, अब देखा नहीं जा रहा था, इसलिए पैदल ही चल दिए। गाव पहुंच जाएंगे तो दूध तो मिल जाएगा। गुरुग्राम में भी मजदूरी कर रहे थे, झांसी में भी कोई न कोई काम तो मिल ही जाएगा।
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आगरा आईएसबीटी पर भीड़
- फोटो : अमर उजाला
दो दिन के लिए ट्रेन चला दें... सब पहुंच जाएंगे
कन्नौज जा रहे मनोज ने कहा कि योगीजी ने बसें चलाई हैं लेकिन ये बहुत कम हैं। आगरा में ही एक लाख से ज्यादा लोग आ चुके हैं। ये बस से कैसे जाएंगे। दो दिन के लिए ट्रेनें चला दी जाएं तो सभी अपने-अपने घर के पास पहुंच जाएंगे। थोड़ा बहुत पैदल चल लेंगे।इससे सड़कों पर भीड़ कम हो जाएगी।
कन्नौज जा रहे मनोज ने कहा कि योगीजी ने बसें चलाई हैं लेकिन ये बहुत कम हैं। आगरा में ही एक लाख से ज्यादा लोग आ चुके हैं। ये बस से कैसे जाएंगे। दो दिन के लिए ट्रेनें चला दी जाएं तो सभी अपने-अपने घर के पास पहुंच जाएंगे। थोड़ा बहुत पैदल चल लेंगे।इससे सड़कों पर भीड़ कम हो जाएगी।