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भालू संरक्षण केंद्र में ‘रंगीला’ की आजादी के दो साल पूरे, दो देशों के सहयोग से हुई थी 'वापसी'

Sun, 12 Jul 2020 08:47 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 12 Jul 2020 08:47 AM IST
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Sloth bear Rangeela completed two year of freedom in bear conservation Center agra
भालू रंगीला - फोटो : WildlifeSOS
उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित भालू संरक्षण केंद्र में 'रंगीला' ने शनिवार को अपनी आजादी के दो साल पूरे कर लिए। वर्ष 2018 में नाचने वाला भालू ‘रंगीला’ काफी सुर्खियों में बना रहा, इसकी घर वापसी के लिए दो देशों की सरकारों से सहयोग रहा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर रंगीला को 11 जुलाई 2018 में यहां लाया गया था। इसके लिए लंबी प्रकिया चली थी। 
Sloth bear Rangeela completed two year of freedom in bear conservation Center agra
कैद में रंगीला (फाइल) - फोटो : WildlifeSOS
दिसंबर 2017 में ‘डांसिंग बेयर’ (नाचने वाले भालू) के रूप में इस्तेमाल के लिए दो भालू ‘रंगीला’ और ‘श्रीदेवी’ भारत से नेपाल अवैध रूप से ले जाए गए थे। वहां अधिकारियों ने सीमा पर ही तस्करों को रोक दिया और दो भालुओं उनसे मुक्त करा लिया। दोनों को काठमांडू के चिड़ियाघर में भेज दिया गया था। 
Sloth bear Rangeela completed two year of freedom in bear conservation Center agra
भालू रंगीला - फोटो : अमर उजाला
चिड़ियाघर में मादा भालू श्रीदेवी अपने घाव और यातनाओं से उभरने में नाकाम रही और उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद 'रंगीला' अकेला रह गया था। उसकी भी हालत दयनीय थी। महीनों तक चली अंतरराष्ट्रीय वार्ता के बाद वाइल्डलाइफ एसओएस और जेन गुडऑल इंस्टीट्यूट नेपाल के सफल प्रयासों के फलस्वरूप रंगीला को अनुमति के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर वापस भारत लाया गया था।
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Sloth bear Rangeela completed two year of freedom in bear conservation Center agra
भालू रंगीला - फोटो : WildlifeSOS
वाइल्डलाइफ एसओएस के वेटरनरी सर्विसेज के उप-निदेशक डॉ. एस. इलिया राजा ने बताया कि जब 'रंगीला' पहली बार भालू संरक्षण केंद्र में आया तब वो बहुत कमजोर था। उसके गिरते स्वास्थ को ठीक करने में महीनों लग गए। हालांकि रंगीला अभी भी मनोवैज्ञानिक तनाव के संकेत प्रदर्शित करता है, जो ठीक होने में अधिक समय लेंगे। 
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Sloth bear Rangeela completed two year of freedom in bear conservation Center agra
भालू संरक्षण गृह में खाने का आनंद लेता भालू - फोटो : अमर उजाला

संस्था के सीईओ और सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि 'रंगीला' के रेस्क्यू को आज दो साल हो गए हैं। वो यहां कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की देखरेख में काफी स्वस्थ हो गया है। उन्होंने भारत में स्लॉथ भालू की आबादी में गिरावट पर चिंता जताई। कहा कि पारंपरिक चीन की दवाइयों में उपयोग के लिए इनके शरीर के अंगों की मांग, भालू के पंजे का सूप और इनके पित्ताशेय की मांग अभी भी है। तस्करी, अवैध शिकार, कम होते जंगल और मानव वन्यजीव संघर्षो से स्लॉथ भालुओं के लिए बहुत गंभीर खतरा है। 

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