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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: मॉकड्रिल के समय नहीं था कोई विशेषज्ञ चिकित्सक, डॉ. अरिन्जय जैन की निगरानी में भर्ती थे 96 मरीज

Sun, 11 Jul 2021 11:15 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 11 Jul 2021 11:15 AM IST
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Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: 96 Patients Admitted Under Supervision Of Dr. Arinjay Jain
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
श्री पारस अस्पताल में मॉकड्रिल के समय कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। आईसीयू को तीन आयुष चिकित्सक 24 घंटे संभालते थे। आठ-आठ घंटे की ड्यूटी होती थी। एक एनेस्थेटिस्ट था जो शाम छह से रात नौ बजे तक तीन घंटे के लिए आता था। 26 अप्रैल की सुबह सात बजे मॉकड्रिल जैसा प्रयोग में डॉ. अरिन्जय के अलावा कोई दूसरा विशेषज्ञ शामिल नहीं रहा। चिकित्सा मानकों के मुताबिक आईसीयू में एमबीबीएस चिकित्सक का होना अनिवार्य है। साथ ही आकस्मिक निर्णय लेने के लिए तीन विशेषज्ञ एमडी मेडिसिन, एमडी एनिस्थीसिया व एमएस जनरल सर्जन होना चाहिए। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि तीन बीएएमएस डिग्री धारक श्री पारस अस्पताल का आईसीयू, वेंटिलेटर व अन्य जीवन रक्षक उपकरणों को संभालते थे। इनकी जांच के लिए 24 घंटे में एक बार तीन घंटे के लिए शाम 6 से रात 9 बजे तक एक एनेस्थेटिस्ट भ्रमण पर आते थे। जिस समय मॉकड्रिल की गई उस समय एनिस्थेटिस्ट भी मौजूद नहीं था।
Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: 96 Patients Admitted Under Supervision Of Dr. Arinjay Jain
श्री पारस अस्पताल में जांच के लिए आए अधिकारी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
डॉ. अरिन्जय जैन के साथ तब एक बीएएमएस, अस्पताल का मैनेजर व अन्य नॉन मेडिको स्टाफ ही मौजूद था। जबकि उस दिन 96 मरीज भर्ती थे। जिनमें 22 गंभीर थे। अस्पताल में आठ वेंटीलेटर थे और 10 बाईपेप मशीनें थीं। मॉकड्रिल के समय सभी जीवन रक्षक उपकरणों पर मरीज भर्ती थे। अन्य मरीजों को सीधे सिलिंडर व अन्य उपकरणों से हाईफ्लो ऑक्सीजन पर निर्भर थे।
 
Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: 96 Patients Admitted Under Supervision Of Dr. Arinjay Jain
श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
आयुष को नहीं आईसीयू संचालन का अधिकार
आयुष या आयुर्वेदिक चिकित्सक कैसे आईसीयू चला सकता है। उसकी चिकित्सा पद्दति अलग है, आईसीयू में पद्दति अलग। बीएएमएस मॉकड्रिल कैसे कर सकते हैं। ऐसा कोई आकस्मिक निर्णय लेने के लिए तीन विशेषज्ञ होना जरूरी है। जिससे कि स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सा बोर्ड के समक्ष जिम्मेदार होते। यहां नियम व मानकों का पालन नहीं हुआ। किसी आयुष चिकित्सक को आईसीयू संचालन का अधिकार नहीं है। - डॉ. देवेंद्र गुप्ता, चिकित्सा मामलों के विधि विशेषज्ञ
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Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: 96 Patients Admitted Under Supervision Of Dr. Arinjay Jain
पुलिस के बीच श्री पारस अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अरिंजय जैन, सफेद शर्ट में - फोटो : अमर उजाला
आक्सीजन पर निर्भरता जांची गई थी
सवाल- मॉकड्रिल कैसे की गई, छंटनी से क्या तात्पर्य है।
जवाब- मॉकड्रिल में मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता जांची गई थी। ऑक्सीजन पूरी तरह बंद नहीं की।
सवाल- ऑक्सीजन निर्भरता जांचने के लिए क्या-क्या किया।
जवाब- ज्यादा ऑक्सीजन ले रहे मरीजों की ऑक्सीजन कम कर देखी गई, उनमें हाइपोक्सिया के लक्षण आ गए। 
सवाल- आईसीयू कौन संभालता है, उनकी क्या शैक्षिणिक योग्यता है।
जवाब- तीन बीएएमएस डिग्री धारक हैं। आठ-आठ घंटे आईसीयू संभालते हैं।
सवाल- बीएएमएस को क्या आईसीयू संचालन का अधिकार होता है।
जवाब- एमबीबीएस मिलना मुश्किल होता है, सभी बीएएमएस बहुत अनुभवी हैं।
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Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: 96 Patients Admitted Under Supervision Of Dr. Arinjay Jain
पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
सवाल- क्या सुबह सात बजे मॉकड्रिल के समय कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद था।
जवाब- हां, मैं स्वयं चीफ फिजिशयन हूं, एक बीएएमएस था। अन्य विशेषज्ञ नहीं था। 
सवाल- 96 भर्ती मरीजों पर कितने चिकित्सक थे, जिन्होंने मरीजों का उपचार किया।
जवाब- सभी का उपचार मेरी निगरानी में होता है, जरूरत पर ऑन कॉल बुला लेते हैं।
सवाल- क्या आईसीयू संचालन के लिए 24 घंटे एक एनेस्थेटिस्ट नहीं होना चाहिए।
जवाब- एक एनेस्थेटिस्ट है जो शाम 6 से 9 तक अस्पताल में रोज बैठते हैं। 
 (सवालों के जवाब डॉ. अरिन्जय जैन ने दिए)

ये भी पढ़ें: ये कैसी जांच: पारस अस्पताल प्रकरण का वीडियो बनाने के शक में पूछताछ, मॉकड्रिल पर सवाल तक नहीं

 
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