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सपने लेकर आईं रिक्शा चालक और किसान की क्रिकेटर बेटियां, क्रिकेट के मैदान में बहा रहीं पसीना
Fri, 22 Nov 2019 12:33 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 22 Nov 2019 12:33 AM IST
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क्रिकेटर बेटियां
- फोटो : अमर उजाला
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क्रिकेट के मैदान में पसीना बहा रहीं बेटियां अपने परिवार की उम्मीदों को पंख देने के लिए बुधवार को माध्यमिक स्टेट क्रिकेट चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने पहुंची। क्रिकेट को अपना कॅरियर बनाने वाली इन क्रिकेटरों के परिवार में किसी के पिता रिक्शा चलाते हैं, तो किसी के पिता किसान और गार्ड हैं। इन क्रिकेटरों का कहना है कि हमारे पिता हमें हर रोज क्रिकेट के मैदान में खेलते हुए देखना चाहते हैं।
क्रिकेट के मैदान में पसीना बहा रहीं बेटियां
- फोटो : अमर उजाला
अयोध्या मंडल की क्रिकेटर अदबिया बानो के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। 12वीं की छात्रा अदबिया (17) बताती हैं कि मैं अपने पिता के सपनों को मैदान में साकार करने की कोशिश कर रही हूं। मेरी कोशिश यह भी है कि मैं और मेरी टीम अच्छा प्रदर्शन कर विजेता बनें। उनका कहना है कि मेरे पिता ने मुझे हमेशा खेलने के लिए उत्साहित किया। हर रोज रात को घर आने के बाद मेरी पढ़ाई की परफॉर्मेंस पूछना भूल जाएं, पर क्रिकेट में क्या किया यह पूछना कभी नहीं भूलते हैं। वह कहते हैं कि मन लगाकर खेल। मेरा नाम, शहर का नाम, देश का नाम रोशन कर।
सहारनपुर की कप्तान मनु
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर की कप्तान मनु के पिता गार्ड हैं। मनु का कहना है कि मेरे पापा सपनों को उड़ान दे रहे हैं। लोगों की हिफाजत की जिम्मेदारी जितनी अच्छी तरह से निभाते हैं मेरे पापा, उतना ही अच्छी तरह से मेरे सपनों को उड़ान देने के लिए मेरे साथ हमेशा खड़े रहते हैं। जिस दिन मैंने क्रिकेट मैदान में उतरने की ठानी, उसी दिन उन्होंने भी यह ठाना कि मेरे खेल में कभी भी कोई दिक्कत नहीं आने देंगे। खेल के लिए पैसे देने से मेरे पिता मुझे कभी मना नहीं करते। मैंने क्रिकेट को अपना कॅरियर इसलिए चुना है क्योंकि इसमें पैसा और नाम दोनों है। अपने पापा के अरमानों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही हूं।
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झांसी की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहीं क्रिकेटर मीनू यादव
- फोटो : अमर उजाला
झांसी की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहीं 15 साल की क्रिकेटर मीनू यादव एक किसान की बेटी हैं। मीनू बताती हैं कि कई बार परिस्थितियां विपरीत होने के बाद भी मेरे पिता मेरे खेल का काफी ध्यान रखते हैं। पूरे दिन खेत में मेहनत करने के बाद जब वह थके हुए घर आते हैं, तो मुझे लगता है कि वह सब कुछ मेरे लिए कर रहे हैं। मेरी कोशिश रहती है कि मैदान में अच्छा प्रदर्शन कर सकूं। कई बार अच्छा प्रदर्शन करने पर उनके चेहरे पर दिखने वाले सुकून से काफी राहत मिलती है। 12वीं की छात्रा मीनू का कहना है कि शौक पूरा करने के लिए पहले खेलना शुरू किया। अब इसे कॅरियर के रूप में देख रही हूं। मेरे पिता हमेशा खेल के लिए मेरे साथ खड़े रहते हैं।
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माध्यमिक स्टेट क्रिकेट चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने पहुंचे खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
क्रिकेटर बेटियों का कहना है कि पिता को उनके खेल से इस कदर मोहब्बत है कि मैदान में आने के बाद लगातार मोबाइल पर हमारी परफॉर्मेंस के बारे में पूछ रहे हैं। इन खिलाड़ियों का कहना है कि कि जिन उम्मीदों से हमारे पिता हर रोज कड़ी मेहनत कर अपनी कमाई का एक हिस्सा हमारे खेल पर खर्च कर रहे हैं, उसी तरह हम भी उन्हें मैदान से लेकर कुछ देना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि क्रिकेट को कॅरियर बनाएं। इसमें शोहरत भी है और दौलत भी।