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बेटे के आने की उम्मीद में पथरा गईं बूढ़ी आंखें, याद आती है बचपन की शरारतें, ऐसी है इनकी कहानी
Fri, 11 Sep 2020 12:10 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 11 Sep 2020 12:10 AM IST
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रामलाल वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला
रामलाल वृद्ध आश्रम में रहते हुए चार बुजुर्गों को दस साल पूरे हो चुके हैं। इन बुजुर्गों को यह उम्मीद है कि उनका बेटा एक दिन आएगा। किसी की आंखें आश्रम के मुख्य द्वार को देखते-देखते पथरा गई हैं, तो कोई आज भी अपने बेटे की बचपन की शरारतें याद कर रोने लगता है। अगली स्लाइड में पढ़िये इन बुजुर्गों की कहानी...
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मूलचंद
- फोटो : अमर उजाला
मेरे जन्मदिन पर बेटा लेने आएगा: मूलचंद
केदार नगर के रहने वाले 62 वर्ष के मूलचंद का कहना है कि आश्रम में दस साल कब निकल गए, पता ही नहीं चला। हर बार मुझे लगता है कि इस बार मेरे जन्मदिन पर बेटा लेने आएगा। पिछले दस साल से मेरा यह भ्रम टूट रहा है।
केदार नगर के रहने वाले 62 वर्ष के मूलचंद का कहना है कि आश्रम में दस साल कब निकल गए, पता ही नहीं चला। हर बार मुझे लगता है कि इस बार मेरे जन्मदिन पर बेटा लेने आएगा। पिछले दस साल से मेरा यह भ्रम टूट रहा है।
हेतराम
- फोटो : अमर उजाला
बेटे की पुरानी बातें आती हैं याद: हेतराम
रामबाग, सीता नगर के निवासी 78 वर्ष के हेतराम गोयल की आंखें बेटे की राह देखते-देखते पथरा गई हैं। दस साल बेटा आश्रम छोड़ गया था। हेतराम कहते हैं कि कई बार बेटे की पुरानी बातें याद आती हैं। फिर सोचता हूं कि मेरी किस्मत में शायद यही था।
ये भी पढ़ें- दुखभरी है वृद्धाश्रम के बुजुर्गों की कहानी, बेटों ने निकाला घर से, फिर भी दिल में है यह आस
रामबाग, सीता नगर के निवासी 78 वर्ष के हेतराम गोयल की आंखें बेटे की राह देखते-देखते पथरा गई हैं। दस साल बेटा आश्रम छोड़ गया था। हेतराम कहते हैं कि कई बार बेटे की पुरानी बातें याद आती हैं। फिर सोचता हूं कि मेरी किस्मत में शायद यही था।
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मदनलाल वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
बेटे को लेकर टूट गया भ्रम: मदनलाल
पथवारी के रहने वाले 85 वर्ष के मदनलाल वर्मा को इस बात का अफसोस है कि दस साल में बेटे को उनकी एक भी बार याद नहीं आई। जब मैं आश्रम आया था, तब मुझे लगा कि मेरा बेटा ज्यादा दिन मेरे बिना रह नहीं सकेगा। लेकिन वह आज तक देखने नहीं आया।
पथवारी के रहने वाले 85 वर्ष के मदनलाल वर्मा को इस बात का अफसोस है कि दस साल में बेटे को उनकी एक भी बार याद नहीं आई। जब मैं आश्रम आया था, तब मुझे लगा कि मेरा बेटा ज्यादा दिन मेरे बिना रह नहीं सकेगा। लेकिन वह आज तक देखने नहीं आया।
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पं. रम्मो गुरु
- फोटो : अमर उजाला
बेटे से दूर रहने की पीड़ा: पं. रम्मो गुरु
शाहगंज के रहने वाले 76 वर्ष के पं. रम्मो गुरु को अभी भी इस बात की आस है कि उनके बेटे को एक दिन अपनी गलती का अहसास होगा। आश्रम में दस साल पूरे कर चुके रम्मो गुरु का मानना है अपने बेटे से दूर रहने की पीड़ा काफी दर्द देती है।
शाहगंज के रहने वाले 76 वर्ष के पं. रम्मो गुरु को अभी भी इस बात की आस है कि उनके बेटे को एक दिन अपनी गलती का अहसास होगा। आश्रम में दस साल पूरे कर चुके रम्मो गुरु का मानना है अपने बेटे से दूर रहने की पीड़ा काफी दर्द देती है।