प्रकृति की मार झेल रहे किसानों पर बुधवार को एक बार फिर आसमानी आफत ने कहर ढ़हाया। भारी बारिश तेज हवाओं और ओलावृष्टि से किसानों की बची फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। ऐसे में किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। तेज हवाओँ से फसल खेतों में बिछ गई है।
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खेतों में कटी पड़ी फसल
- फोटो : अमर उजाला
आगरा, मथुरा, एटा, कासगंज, मैनपुरी और फिरोजाबाद में बुधवार शाम आंधी के बाद बारिश और भारी ओलावृष्टि हुई। तेज हवाओं ने खेतों में खड़े गेहूं को गिरा दिया है। बिजली व्यवस्था भी छिन्न भिन्न हो गई। कई जगह पेड़ टूटकर सड़कों पर गिर गए हैं।
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खेतों में कटी पड़ी फसल
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तीन दिन से लगातार बरसात के बाद बची गेहूं की फसल को अब ओलावृष्टि ने नष्ट कर दिया। पूरे ब्रज में 50 प्रतिशत से अधिक गेहूं की फसल अभी खेतों में ही पड़ी हुई है। बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में पकी हुई फसल जमीन पर लेट गई है। जिसके कारण बालियों में लगा हुआ गेहूं भूमि पर बिखर गया।
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सड़क पर पड़े ओले
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार की देर शाम को तेज आंधी एवं बारिश के बाद सोमवार की सुबह हुई बारिश से गेहूं की फसल की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पडे़गा। ब्रज के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज और मेनपुरी जिलों में सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह से भीग जाने से सड़ने के कगार पर है। ऐसे में गेहूं की फसल से फायदे की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों किसानों के चेहरों की रंगत बदल गई है।
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ओलावृष्टि से बर्बाद फसलें
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किसानों की मानें तो इस सप्ताह तीन दिन बारिश हो गई है। इससे गेहूं की गुणवत्ता खराब होगी। इसका असर किसानों की आमदनी पर पड़ना तय है। वहीं अधिकांश जगहों पर गेहूं की फसल की कटाई हो चुकी है। गेहूं के बोझ खेतों में पडे़ हैं। ऐसे में बारिश और आंधी से पचास प्रतिशत तक गेहूं की फसल बर्बाद होने की आशंका है।