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राधाष्टमी: बरसाना में नहीं यहां अवतरित हुईं थीं राधा, 11 माह बाद खुले नेत्र तो सामने थे कान्हा

Mon, 17 Sep 2018 02:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 17 Sep 2018 02:01 PM IST
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Radha astami radha birth place rawal village
राधा
ब्रज में राधाष्टमी की धूम है। बरसाना के श्रीराधारानी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ है। उनके जन्म की खुशियां मनाई जा रही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राधा कौन थीं, तो जवाब होगा भगवान श्रीकृष्ण की प्रेयसी, उनकी सखी। कृष्ण की राधा और राधा के कृष्ण इस पवित्र संबंध से तो पूरी दुनिया वाफिक हैं, लेकिन राधा के जीवन के बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे। 

राधाष्टमी 2018: बरसाना में नहीं यहां अवतरित हुईं थीं राधा, 11 माह बाद खुले नेत्र तो सामने थे कान्हा

Radha astami radha birth place rawal village
radha birth place rawal village
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधा का जन्म माता की कोख से नहीं हुआ, बल्कि वो अवतरित हुईं। कहा जाता है कि बरसाना से 50 किमी दूर रावल गांव में राधा अवरित हुई थीं। रावल गांव में राधा का मंदिर है। रावल मंदिर के पुजारी ललित मोहन कल्ला बताते हैं कि करीब पांच हजार साल पहले यहां यमुना की धारा कल-कल बहती थी। 

राधाष्टमी 2018: बरसाना में नहीं यहां अवतरित हुईं थीं राधा, 11 माह बाद खुले नेत्र तो सामने थे कान्हा

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राधा कृष्ण
शास्त्रों के अनुसार उस वक्त बृज के सबसे बड़े राजा वृषभान की पत्नी कीर्ति यमुना में नित्य प्रति यमुना स्नान कर पूजा-अर्चना करतीं थीं। उन्हें पुत्री की लालसा थी। एक दिन पूजा करते समय यमुना से कमल का फूल प्रकट हुआ। स्वर्ण आभा के इस फूल से किरणों का उदय हो रहा था। कीर्ति के पास जाते ही फूल खिल गया, जिस पर एक नन्हीं सी बच्ची थी। उसके नेत्र बंद थे। वो बच्ची कोई और नहीं बल्कि स्वयं राधारानी ही थीं। 
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radha ashtami 2018 barsana - फोटो : अमर उजाला
राधा के अवतार के 11 महीने बाद मथुरा में कंस के कारागार में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। वो रात में गोकुल में नंदबाबा के घर पर पहुंचाए गए। तब नंद बाबा ने सभी जगह कृष्ण का जन्मोत्सव संदेश भेजा। राजा वृषभान को भी न्यौता मिला। जब बधाई लेकर वृषभान अपने गोद में राधारानी को लेकर यहां गए तो राधारानी घुटने के बल चलते हुए कान्हा के पास पहुंची। वहां बैठते ही राधा के नेत्र खुले और उन्होंने पहला दर्शन बालकृष्ण का किया।
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radha ashtami 2018 barsana - फोटो : अमर उजाला
रावल गांव में स्थापित राधा मंदिर के सामने प्राचीन बगीचा है। यहां आज भी दो पेड़ ऐसे हैं जो एक-दूसरे में समाहित हैं। इन्हें राधा-कृष्ण का ही रूप बताया जाता है। एक पेड़ पीपल का जबकि दूसरा मोर्छली का है। इनमें से एक का रंग श्वेत है तो दूसरा श्याम रंग का।  
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