{"_id":"5d6de8068ebc3e016025e5a8","slug":"preparation-of-radha-ashtami-2019-start-in-barsana-mathura","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"सजने-संवरने लगा बरसाना, छह सितंबर को राधारानी का जन्मोत्सव, होंगे ये कार्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सजने-संवरने लगा बरसाना, छह सितंबर को राधारानी का जन्मोत्सव, होंगे ये कार्यक्रम
Wed, 04 Sep 2019 12:31 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 04 Sep 2019 12:31 AM IST
विज्ञापन
राधारानी मंदिर की छत पर संगमरमर की सफेद छतरी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब ब्रजभूमि राधारानी के जन्मोत्सव के लिए सजने-संवरने लगी है। मंदिरों में तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। इसका खास उत्साह बरसाना में देखने को मिल रहा है। यहां कृष्ण प्रिय राधारानी के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए भक्त आने लगे हैं। इस बार राधारानी 6 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे प्राकट्य होंगी। इस पल का साक्षी बनने को देश-दुनिया के लाखों श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं। इसके लिए बरसाना के साथ आसपास के सभी गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं फुल होती जा रही हैं।
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
तीर्थ नगरी बरसाना लाडली जी के जन्मोत्सव के लिए तैयारियों में लगा है। बरसाना के साथ-साथ अष्ठ सखियों के गांव के लोग भी विशेष तैयारी में लगे है। ब्रह्मांचल पर्वत पर विराजमान लाडली जी का निज महल सजधज के तैयार है। मानगढ़ी, मानमंदिर, मोर कुटी, खोर साखरी, गहवरवन, दान गढ़, विलाशगढ़ और कीर्ति मंदिर सभी कृष्ण प्रिय राधे के जन्मोत्सव की तैयारी अंतिम पड़ाव पर है। हर तरफ राधे-राधे की धूम है।
राधारानी का विग्रह का पंचामृत (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बृषभान नंदिनी भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी को अनुराधा नक्षत्र तथा मूल नक्षत्र में जन्म लेंगी। मूल नक्षत्र में जन्म लेने से राधा रानी की मूल शांति के लिए सेवायत गुरुवार रात दो बजे गर्भग्रह में प्रवेश करेंगे। मूल शांति के लिए 27 कुओं का जल, 27 पेड़ों की पत्ती, 27 तरह की औषधियों, 27 मेवा तथा 27 ब्राह्मण, सोने चांदी की मूल मूलनी और कांस्य के बना तेल के छाया पात्र के साथ हवन आदि होगा। इसके बाद दूध, दही, शहद, बूरा, इत्र, घी, गुलाबजल, गोघृत, पंच मेवा, पंच नवरत्न, केसर आदि से उनके श्रीविग्रह का अभिषेक गोस्वामी समाज के तीनों थोक के सेवायत करते है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बरसाना
प्रिय पीतम की बूढ़ी लीलाओं का कार्यक्रम
4 सितंबर -ऊंचागाव राधारानी की प्रधान सखी ललिता जी का जन्मोत्सव।
5 सितंबर -शाम को राधारानी मंदिर में नंदगाव-बरसाना के गोस्वामियों द्वारा बधाई गायन एवं नंदगांव वालों को बधाई का लड्डू प्रसाद वितरण।
6 सितंबर- प्रात: चार बजे अभिषेक, राधा जन्मोत्सव, नंदगांव-बरसाना के गोस्वामी समाज द्वारा बधाई गायन एवं शाम को सफेद छतरी में श्रीजी के विशेष दर्शन।
7 सितंबर - मयूर कुटी की मयूर नृत्य लीला।
8 सितंबर- विलास गढ़ पर रास लीला और मान मंदिर में मान लीला।
9 सितंबर - सांकरी खोर में ठाकुरजी की चोटी बंधन लीला एवं शाम को गाजीपुर स्थित प्रेम सरोवर में नौका विहार लीला, डोंगा लीला।
10 सितंबर- ऊंचा गांव में स्थित दाऊजी मंदिर श्याम सगाई एवं सखिगिरी पर्वत पर ब्यावला लीला एवं शाम को प्रिया कुंड में नौका विहार, डोंगा लीला।
11 सितंबर - सांकरी खोर में मटकी फोड़ लीला, बूढ़ी लीला एवं शाम को दंगल।
12 सितंबर - कदमखंडी में चीरहरण लीला।
13 सितंबर - राधा बाग में महारास लीला ।
4 सितंबर -ऊंचागाव राधारानी की प्रधान सखी ललिता जी का जन्मोत्सव।
5 सितंबर -शाम को राधारानी मंदिर में नंदगाव-बरसाना के गोस्वामियों द्वारा बधाई गायन एवं नंदगांव वालों को बधाई का लड्डू प्रसाद वितरण।
6 सितंबर- प्रात: चार बजे अभिषेक, राधा जन्मोत्सव, नंदगांव-बरसाना के गोस्वामी समाज द्वारा बधाई गायन एवं शाम को सफेद छतरी में श्रीजी के विशेष दर्शन।
7 सितंबर - मयूर कुटी की मयूर नृत्य लीला।
8 सितंबर- विलास गढ़ पर रास लीला और मान मंदिर में मान लीला।
9 सितंबर - सांकरी खोर में ठाकुरजी की चोटी बंधन लीला एवं शाम को गाजीपुर स्थित प्रेम सरोवर में नौका विहार लीला, डोंगा लीला।
10 सितंबर- ऊंचा गांव में स्थित दाऊजी मंदिर श्याम सगाई एवं सखिगिरी पर्वत पर ब्यावला लीला एवं शाम को प्रिया कुंड में नौका विहार, डोंगा लीला।
11 सितंबर - सांकरी खोर में मटकी फोड़ लीला, बूढ़ी लीला एवं शाम को दंगल।
12 सितंबर - कदमखंडी में चीरहरण लीला।
13 सितंबर - राधा बाग में महारास लीला ।
विज्ञापन
राधा रानी मंदिर, बरसाना
- फोटो : Social media
कहा जाता है कि 600 वर्ष पूर्व दक्षिण भारत से किशोरी जी के परम भक्त श्रीनारायण भट्ट बरसाना आए। वो किशोरी की भक्तिमय हो गए। लाडली जी ने उन्हें ब्रह्मंचल पर्वत पर होने का स्वप्न दिया। तब श्रीनारायण भट्ट ने अपने शिष्य नारायण स्वामी के साथ किशोरी जी का ब्रह्मांचल पर्वत श्रीजी मंदिर एवं जयपुर मंदिर के बीच प्राकट्य किया।