आगरा में इस साल 48 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी यमुना में सीवेज पिछले साल के मुकाबले ज्यादा जा रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अप्रैल महीने में यमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कैलाश घाट से प्रवेश करते हुए ताजमहल के आगे तक शहर में पहुंची यमुना लगभग तीन गुना प्रदूषित हुई है। कैलाश घाट और ताजमहल के पीछे दशहरा घाट, दोनों ही जगहों पर बीते साल से ज्यादा यमुना नदी में जहर घुला है। यहां पानी सिंचाई के लायक भी नहीं है, जबकि यमुना में सीवर न पहुंचे, इसलिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन और सीवर लाइन चालू करने के नाम पर वीएटेक वबाग को एक साल में 48 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा और आगरा में यमुना नदी का पानी आचमन के लायक छोड़िए, सिंचाई के काबिल भी नहीं बचा। आगरा में ही 61 नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। नालों की सिल्ट, कचरा और ट्रीटमेंट के बिना पहुंच रहे नालों के जरिए यमुना नदी में सीवर पहुंच रहा है।
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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
कैलाश घाट से ताजमहल के बीच ही 91 नाले यमुना को मैला कर रहे हैं, जिनमें से कागजों पर केवल 28 नालों का ट्रीटमेंट हो रहा है। शहर के सबसे बड़े मंटोला नाले में 148 एमएलडी गंदा पानी आता है, जिसमें से 78 एमएलडी ही धांधूपुरा एसटीपी तक पहुंचता है, बाकी बाईपास करके बिना ट्रीटमेंट के यमुना में गिर रहा है।
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संगमरमर के पत्थर पर दाग (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण के कारण ताज पर कीड़ों का हमला
यमुना में नाले के पानी के कारण उपजे दलदल से ताज पर गोल्डी काइरोनोमस कीड़ों का हमला हो रहा है। हर सप्ताह शुक्रवार को एएसआई ताज के पीछे की संगमरमरी दीवार की धुलाई करने को मजबूर है। बीते चार साल से ताजमहल पर कीड़ों का हमला बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्वत: संज्ञान लेने के बाद भी यमुना नदी में सीवर गिरना बंद नहीं हुआ। सीवेज को लेकर नीरी और सीपीसीबी की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होनी है।
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ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुना
- फोटो : अमर उजाला
बिना ट्रीटमेंट नाले गिर रहे नदी में
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव ने कहा कि यमुना नदी में बिना ट्रीटमेंट किए 61 नाले गिर रहे हैं, इसलिए प्रदूषण की मात्रा पानी की उपलब्धता के साथ घटती, बढ़ती रहती है। एसटीपी की क्षमता कम है, जबकि सीवेज ज्यादा है। नए एसटीपी बनने के बाद ही सुधार संभव है।