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यूपीः दूषित हुआ इस गांव का पानी, खतरे में लोगों की जिंदगी, जल निगम की जांच में हुआ खुलासा
Mon, 18 Nov 2019 12:40 AM IST
Abhishek Saxena
ज्योत्यवेंद्र दुबे, अमर उजाला, मैनपुरी
ज्योत्यवेंद्र दुबे, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 18 Nov 2019 12:40 AM IST
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पानी के दूषित होने की जानकारी मिलने के बाद एकत्रित हुए ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
विकास खंड के गांव कीरतपुर का पानी फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा से दूषित हो गया है। जल निगम की जांच में इसका खुलासा हुआ है। सब कुछ जानने के बाद भी यहां के लोग ये पानी पीने को मजबूर हैं। उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। मैनपुरी और करहल के बीच बसे गांव कीरतपुर की आबादी लगभग दो हजार है। यहां पेयजल आपूर्ति एक पानी की टंकी है। साथ ही 21 हैंडपंप हैं। हाल ही में जल निगम ने टंकी के पानी की जांच कराई थी तो इसमें फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई थी। इसके बाद गांव के सभी हैंडपंप के पानी के नमूने की भी जांच की गई। इसकी रिपोर्ट भी निगेटिव ही आई। बाद इन नमूनों की जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया। वहां से भी नमूने फेल हो गए।
जल निगम ने हैंडपंपों पर लाल निशान लगाए
- फोटो : अमर उजाला
कीरतपुर के पानी में फ्लोराइड की मात्रा दो मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है। इन हालात में जल निगम ने हैंडपंपों पर लाल निशान लगाने के साथ ही गांव के लोगों को इस पानी का उपयोग करने से मना किया है। लेकिन कोई दूसरा उपाय न होने के कारण ग्रामीण यही पानी पीने को मजबूर हैं। जल निगम ने पंचायत राज विभाग को भी पत्र भेजकर पानी का प्रयोग रोकने को कहा है। क्योंकि जल निगम के नलकूप में भी दूषित पानी ही आ रहा है।
हैंडपंप से आता दूषित पानी
- फोटो : अमर उजाला
जल निगम के अधिशासी अभियंता राजकुमार शर्मा ने इस समस्या से निजात पाने के लिए फ्लोराइड रिमूवल यूनिट स्थापित करना ही एक मात्र जरिया है। इसके लिए पत्र लिखा गया है। ये यूनिट नलकूप में लगाई जाएगी, इससे टंकी के पानी की ही पूरे गांव में आपूर्ति होगी। लेकिन इसमें धनराशि एक बड़ा रोड़ा है। इस यूनिट की स्थापना के लिए लगभग 85 लाख रुपये के बजट की आवश्यकता होगी, ये फंड कहां से आएगा ये सबसे बड़ी मुसीबत है।
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जल निगम ने हैंडपंपों पर लाल निशान लगाए
- फोटो : अमर उजाला
जल निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए गांव के आसपास लगभग एक किलोमीटर तक बोर कर पानी की जांच की। ताकि ठीक पानी मिलने पर बोरिंग कर टंकी को सप्लाई दी जा सके। लेकिन कहीं भी अच्छा पानी न मिलने से जल निगम ने भी सारी उम्मीद छोड़ दी है। राजकुमार शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल निगम का कहना है कि जल निगम का काम पानी की जांच करना है। जांच में कीरतपुर केअधिकांश नमूने फेल हुए हैं। हैंडपंपों पर लाल निशान लगाने के साथ ही पानी पीने के लिए मना किया गया है। उच्चाधिकारियों को भी इसकी रिपोर्ट भेजी गई है, फंड मिलने पर फ्लोराइड रिमूवल यूनिट की स्थापना कराई जाएगी।
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कीरतपुर गांव के ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
दूषित पानी पीकर ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। गांव निवासी प्रवीन ने बताया कि उसके परिवार में सभी लोग पेट रोग से पीड़ित हैं। दस्त और पेट दर्द तो आम बात हो गई है। गांव के अन्य लोग भी दूषित पानी पीने के चलते इस समस्या का सामना कर रहे हैं। लेकिन उनके सामने इस पानी को पीने की बजाए दूसरा कोई रास्ता नहीं है। गांव के सभी हैंडपंपों में खराब पानी आ रहा है। हम इस बात को जानते हैं, इसके बाद भी रोजाना यही पानी पीने के लिए मजबूर हैं, इसमें प्रशासन को निर्णय लेना चाहिए। संदीप कुमार।