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यूपी: बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था का 'बोझ' ढो रहे तीमारदार, तड़प रहे मरीज, जिम्मेदार बेपरवाह

Mon, 26 Aug 2019 12:24 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 26 Aug 2019 12:24 AM IST
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patient's family member carried oxygen cylinder on shoulders in sn medical college agra
स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलतीं दो तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
आगरा के सरोजिनी नायूड मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) को मिनी पीजीआई का दर्जा दिलाने के लिए कॉलेज प्रशासन और नेताजी पैरवी में लगे हुए हैं। कॉलेज में चिकित्सकीय सुविधाएं किस हाल में है, यह तस्वीरें इसकी पोल खोल रही हैं। शनिवार को कंधे पर सिलिंडर रखकर तीमारदार मरीज को वार्ड तक लेकर पहुंचा। दूसरे मामले में एंबुलेंस में गंभीर मरीज को छोड़कर स्टाफ ही गायब हो गया। जैसे-तैसे चालक ने मरीज को आइसीयू तक पहुंचाया।
patient's family member carried oxygen cylinder on shoulders in sn medical college agra
कंधे पर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जाता तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
डौकी के खजान सिंह के पिता जमुनादास (65) को छाती में दर्द हुआ, उन्हें सुबह इमरजेंसी में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने हृदयाघात आने की जानकारी दी। दोपहर में करीब एक बजे इमरजेंसी से वार्ड के लिए भेजा। वार्ड आने के बाद यहां कोई वार्ड ब्वाय नहीं था, स्ट्रेचर भी नहीं मिला। कोई इंतजाम होते न देख तीमारदार ने कंधे पर सिलिंडर रखा और एक हाथ से हृदय रोगी पिता को संभालते हुए वार्ड तक पहुंचाया। खजान सिंह का कहना है कि मदद के लिए कोई स्टाफ नहीं आया। चालक ने भी मरीज को एंबुलेंस से जल्दी उतारने को कहा।
patient's family member carried oxygen cylinder on shoulders in sn medical college agra
एंबुलेंस में मरीज छोड़कर गायब हुआ स्टाफ - फोटो : अमर उजाला
खेरागढ़ के अशोक कुमार की फेफड़ों की बीमारी दी। जांच में फेफड़ों में पानी पाया गया। हालत नाजुक थी, इमरजेंसी से आइसीयू में भर्ती करने के लिए एंबुलेंस में ऑक्सीजन लगाकर वार्ड भेज दिया। वार्ड तक मरीज को पहुंचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। मरीज चलने की स्थिति में नहीं था। करीब 20 मिनट तक मरीज एंबुलेंस में ही रहा। सांस उखड़ने पर परिजन अंबू बैग से ऑक्सीजन देने लगे। जब कोई नहीं आया तो चालक ने ही सहयोग कर वार्ड तक पहुंचाया।
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एसएन मेडिकल कालेज - फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों की कार्रवाई भी सुधार कराने और नोटिस देंगे जैसे रटे-रटाए बयान तक ही सिमट गई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ जीके अनेजा का कहना है कि मरीज को वार्ड तक ले जाने के लिए वार्ड ब्वाय तय किए हैं, स्ट्रेचर पर सिलिंडर स्टैंड भी लगवाए गए हैं। मरीज को सुविधा क्यों नहीं मिली, स्पष्टीकरण मांगा है। एंबुलेंस में स्टाफ नहीं रहने पर कहा कि एंबुलेंस की चेक लिस्ट बनाने के आर्डर जारी कर दिए हैं। अब हर राउंड पर एंबुलेंस स्टाफ की ड्यूटी और सुविधाएं नोट कर रिपोर्ट देनी होगी।
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तीमारदार खींच रहे ऑक्सीजन सिलिंडर, स्ट्रेचर से ढोया जा रहा सामान (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का खामियाजा मरीज और तीमारदारों को उठना पड़ा है। 

व्यवस्थाओं की पोल खोलते मामले:
24 जून: स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार को अपने मरीज को स्कूटर पर बांधकर ले जाना पड़ा। 
29 जून: बरहन की मरीज ललिता को स्ट्रेचर नहीं मिला। तीमारदार कंधे पर रखकर ले गया।
13 जुलाई: दीपमाला अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए हुए थी, पति कंधे पर रखकर ले गया। 
24: जुलाई: कागारौल के राकेश अपने कैंसर रोगी पिता को स्ट्रेचर पर लादकर बच्चों से धक्का लगवाते ले गए।
27 जुलाई:  स्ट्रेचर न मिलने पर बीमार पत्नी को गोद में उठाकर आठ मंजिल पर ले गया पति। 
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