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आगरा: 'शिक्षित' बेटी ने बदला गांव का माहौल, महिलाएं बोलीं- हमहूं बिटियन कौं पढ़ाइके सरला बनावेंगे...
Wed, 17 Mar 2021 11:58 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 17 Mar 2021 11:58 AM IST
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बड़ा गांव की सामाजिक पंचायत को संबोधित करतीं सरला सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में जैतपुर के बड़ा गांव की सामाजिक पंचायत ने महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की तो आज वहां का माहौल बदला हुआ है। पढ़ी लिखी बेटी सरला सिंह गुर्जर को प्रधान बनाने के पंचायत में लिए गए फैसले के बाद गांव की किसी भी गली, नुक्कड़ या चौपाल पर बैठ जाइए, गांव की बेटियों के लिए प्रेरणा के तौर पर सरला सिंह की मिसालें देते लोग थक नहीं रहे है। गांव की शीला, कमला, लोहड़ी, ठेंकुली देवी आदि ने तो कहा कि हमहूं बिटियन कौं पढ़ाइके सरला जैसी बनावेंगे, प्रधानी में झगडे़ झंझट नहीं होंगे, गांव की दशा ऊ सुधर जागी...।
चौपाल में मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को बस्ती में बीमारी से मौत होने पर बैठे गांव के लोगों की जुबां पर भी पंचायत में सरला सिंह को प्रधान बनाने के निर्णय की चर्चा हो रही थी। इस फैसले से लोग गांव का मान सम्मान बढ़ने, गांव की तरक्की की उम्मीदें पालने लगे हैं। वहीं मुश्किल में फंसे परिवारों की सरला द्वारा की गई मदद पर भी लोग बातें करते सुनाई दिए। बेटियों को पढ़ाने की प्रेरणा के रूप में सरला बड़ा गांव की पहचान बनी है। आसपास के अन्य गांवों में भी इसकी नजीर पेश की जा रही है। रविवार को बड़ा गांव की सामाजिक पंचायत में किलेदार सिंह की परास्नातक बेटी सरला सिंह के पक्ष में प्रधान पद के पांच दावेदार निर्वतमान प्रधान प्रहलाद सिंह, भुल्ले गुर्जर, राज कुमार, सियाराम और गीता ने चुनाव मैदान से हटने का निर्णय लिया था।
बड़ा गांव में चौपाल और सरला का फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बड़ागांव की बड़ी समस्याएं
पांच किलोमीटर की परिधि में ग्राम पंचायत का विस्तार है। पर, गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं है। सर्दी-जुकाम, बुखार होने पर भी लोगों को कस्बों तक दौड़ लगानी पड़ती है। यहां के संपर्क मार्गों को पक्का कराने की भी चुनौती है। सरला सिंह ने बताया कि गांव की हर समस्या का समाधान सुनिश्चित होगा। पेंशन, शौचालय के लिए महिलाओं को भटकना नहीं पडे़गा।
ये भी पढ़ें- मिसाल: आगरा में पंचायत ने लिया शिक्षित बेटी को प्रधान चुनने का फैसला, पक्ष में पीछे हटे दावेदार
पांच किलोमीटर की परिधि में ग्राम पंचायत का विस्तार है। पर, गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं है। सर्दी-जुकाम, बुखार होने पर भी लोगों को कस्बों तक दौड़ लगानी पड़ती है। यहां के संपर्क मार्गों को पक्का कराने की भी चुनौती है। सरला सिंह ने बताया कि गांव की हर समस्या का समाधान सुनिश्चित होगा। पेंशन, शौचालय के लिए महिलाओं को भटकना नहीं पडे़गा।
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बड़ा गांव में हुई सामाजिक पंचायत
- फोटो : अमर उजाला
बेटी ने परिवार संभाला, गांव को भी संवारेगी : किलेदार
पंचायत में सरला सिंह को प्रधान बनाने के फैसले ने उनके पिता किलेदार सिंह को गर्व से भर दिया है। उन्होंने कहा कि बड़ी बेटी ने छोटी बेटियों की पढ़ाई, नौकरी, शादी में मदद की। बेटे की मौत के बाद परिवार को संभाला। अब गांव को भी संवारेगी। पंचायत के निर्णय के बाद घर पर दूूसरे गांव के लोग भी पहुंच रहे है। जब सब लोग कहते हैं कि बेटी हमारे गांव में भी बड़ागांव जैसा ही सामाजिक परिवेश बनाने के लिए आना, तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
पंचायत में सरला सिंह को प्रधान बनाने के फैसले ने उनके पिता किलेदार सिंह को गर्व से भर दिया है। उन्होंने कहा कि बड़ी बेटी ने छोटी बेटियों की पढ़ाई, नौकरी, शादी में मदद की। बेटे की मौत के बाद परिवार को संभाला। अब गांव को भी संवारेगी। पंचायत के निर्णय के बाद घर पर दूूसरे गांव के लोग भी पहुंच रहे है। जब सब लोग कहते हैं कि बेटी हमारे गांव में भी बड़ागांव जैसा ही सामाजिक परिवेश बनाने के लिए आना, तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
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सामाजिक पंचायत को संबोधित करतीं सरला सिंह
- फोटो : अमर उजाला
महिलाओं को मिलेगी खुले में शौच से मुक्ति: सरला
परास्नातक और पत्रकारिता की पढ़ाई कर प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी कर रहीं सरला सिंह गुर्जर ने पंचायत के फैसले के बाद कहा कि महिलाएं खुले में शौच कर शर्मसार हो रही हैं। बुजुर्ग और विधवाओं को पेंशन तक नहीं मिल रही है। शासन की योजनाओं की उन्हें जानकारी तक नहीं है। वे सभी जरूरतमंदों को उनका हक दिलाने की कोशिश करेंगी।
परास्नातक और पत्रकारिता की पढ़ाई कर प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी कर रहीं सरला सिंह गुर्जर ने पंचायत के फैसले के बाद कहा कि महिलाएं खुले में शौच कर शर्मसार हो रही हैं। बुजुर्ग और विधवाओं को पेंशन तक नहीं मिल रही है। शासन की योजनाओं की उन्हें जानकारी तक नहीं है। वे सभी जरूरतमंदों को उनका हक दिलाने की कोशिश करेंगी।