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नवरात्र विशेष: आत्मरक्षा से लेकर आत्मनिर्भरता तक सिखा रहीं आगरा की नौ शक्तियां
Sat, 17 Oct 2020 12:28 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 17 Oct 2020 12:28 PM IST
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महिला सशक्तिकरण की उदाहरण हैं ये महिलाएं और युवतियां
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में नौ शक्तियां महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं। उनको आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा में निपुण बना रही हैं। बच्चियों को शिक्षित करने, उन्हें बीमारियों से बचाने की मुहिम चला रही हैं। अमर उजाला शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्र के पहले दिन इन नौ शक्तियों और उनकी मुहिम से आपको रूबरू करा रहा है।
छात्राओं को संबोधित करतीं अपर्णा राजावत (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
एक लाख से अधिक युवतियों को दिया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
एक लाख से अधिक युवतियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालीं अपर्णा राजावत का लक्ष्य हर युवती को अपराजिता बनाना है। राजावत ने पिंक बेल्ट मिशन शुरू कर इसका बीड़ा उठाया है। 28 फरवरी, 2018 को पिंक बेल्ट मिशन की स्थापना की गई और अब यह सात राज्यों में काम कर रहा है। 19 फरवरी 2020 को राजावत ने एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में 7401 युवतियों को एकसाथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। हॉलीवुड के फिल्म डायरेक्टर जान मैकलीट ने भी अपर्णा के पिंक बेल्ट मिशन और भारतीय महिलाओं की स्थिति को आगरा में शूट किया।
एक लाख से अधिक युवतियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालीं अपर्णा राजावत का लक्ष्य हर युवती को अपराजिता बनाना है। राजावत ने पिंक बेल्ट मिशन शुरू कर इसका बीड़ा उठाया है। 28 फरवरी, 2018 को पिंक बेल्ट मिशन की स्थापना की गई और अब यह सात राज्यों में काम कर रहा है। 19 फरवरी 2020 को राजावत ने एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में 7401 युवतियों को एकसाथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। हॉलीवुड के फिल्म डायरेक्टर जान मैकलीट ने भी अपर्णा के पिंक बेल्ट मिशन और भारतीय महिलाओं की स्थिति को आगरा में शूट किया।
चाइल्ड लाइन में कोआर्डिनेटर ऋतु वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
19 बालिकाओं को वधू बनने से बचाया, मुहिम जारी
चाइल्ड लाइन में आठ साल से कोआर्डिनेटर ऋतु वर्मा अब तक 19 बालिकाओं को वधू बनने से बचा चुकी हैं। इस दौरान उन्हें लोगों के उग्र विरोध का सामना भी करना पड़ा। वह बताती हैं कि आज भी देहात क्षेत्र में बाल विवाह हो रहे हैं। हमारे पास सूचना आती है तो हम बाल विवाह को रुकवाने के लिए पहुंचते हैं। वहां लोग विरोध करते हैं। हमने ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए भी मुहिम चला रहे हैं ताकि वे बच्चों का विवाह न कराएं। इससे बच्चों को मानसिक पीड़ा तो होती ही है, उनका विकास भी रुक जाता है।
चाइल्ड लाइन में आठ साल से कोआर्डिनेटर ऋतु वर्मा अब तक 19 बालिकाओं को वधू बनने से बचा चुकी हैं। इस दौरान उन्हें लोगों के उग्र विरोध का सामना भी करना पड़ा। वह बताती हैं कि आज भी देहात क्षेत्र में बाल विवाह हो रहे हैं। हमारे पास सूचना आती है तो हम बाल विवाह को रुकवाने के लिए पहुंचते हैं। वहां लोग विरोध करते हैं। हमने ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए भी मुहिम चला रहे हैं ताकि वे बच्चों का विवाह न कराएं। इससे बच्चों को मानसिक पीड़ा तो होती ही है, उनका विकास भी रुक जाता है।
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समाजसेवी शीतल अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
अच्छे स्वास्थ्य के बारे में महिलाओं को जागरूक कर रहीं
समाजसेवी शीतल अग्रवाल ने वर्ष 2013 में महिलाओं को अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की मुहिम शुरू की। मासिक धर्म के बारे में जानकारी देकर साफ-सफाई के लिए जागरूक किया। करियर के शुरुआती दौर में शीतल एक विद्यालय में प्रधानाचार्या बनीं और उन्हें पता चला कि इस बारे में जानकारी का अभाव है। पहली बार तीन महिलाओं को जागरूक किया। पैड का वितरण शुरू किया। अभियान जारी है। शीतल को विश्व हिंदू महासंघ ने मातृ शक्ति सम्मान, मेयर नवीन जैन ने महिला सशक्तिकरण और ‘अमर उजाला’ ने नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा है।
समाजसेवी शीतल अग्रवाल ने वर्ष 2013 में महिलाओं को अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की मुहिम शुरू की। मासिक धर्म के बारे में जानकारी देकर साफ-सफाई के लिए जागरूक किया। करियर के शुरुआती दौर में शीतल एक विद्यालय में प्रधानाचार्या बनीं और उन्हें पता चला कि इस बारे में जानकारी का अभाव है। पहली बार तीन महिलाओं को जागरूक किया। पैड का वितरण शुरू किया। अभियान जारी है। शीतल को विश्व हिंदू महासंघ ने मातृ शक्ति सम्मान, मेयर नवीन जैन ने महिला सशक्तिकरण और ‘अमर उजाला’ ने नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा है।
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समाजसेवी डॉ. हृदेश चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
300 से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहीं
समाजसेवी डॉ. हृदेश चौधरी ने समाज के उस वर्ग को शिक्षित करने का संकल्प लिया, जो जन सुविधाओं से पूरी तरह से वंचित हैं। वह पिछले सात सालों से आराधना संस्था के माध्यम से गाड़िया लुहार जाति (घुमंतु समाज) के तीन सौ से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर सुनहरा भविष्य दे रही हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चियों की है। ताजनगरी में सड़कों के किनारे करीब 500 गाड़िया लुहार जाति के परिवार रहते हैं। संस्था ने कई परिवारों के आधार और वोटर कार्ड बनवाने में मदद की। हृदेश चौधरी को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।
समाजसेवी डॉ. हृदेश चौधरी ने समाज के उस वर्ग को शिक्षित करने का संकल्प लिया, जो जन सुविधाओं से पूरी तरह से वंचित हैं। वह पिछले सात सालों से आराधना संस्था के माध्यम से गाड़िया लुहार जाति (घुमंतु समाज) के तीन सौ से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर सुनहरा भविष्य दे रही हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चियों की है। ताजनगरी में सड़कों के किनारे करीब 500 गाड़िया लुहार जाति के परिवार रहते हैं। संस्था ने कई परिवारों के आधार और वोटर कार्ड बनवाने में मदद की। हृदेश चौधरी को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।