हिंदू धर्म के सनातन धर्मावलंबियों की आस्था से खिलवाड़ करने के लिए सन् 1773 में मुगल शासकों ने बरसाना के लाडली जी मंदिर पर कब्जा कर लिया था। उस समय बरसाना भरतपुर रजवाड़े के राजा सूरजमल के पौत्र के अधीन था। मुगल शासक का भरतपुर नरेश सूरजमल के पौत्र की सेना से युद्ध हुआ। भरतपुर रजवाड़े की सेना पीछे हट गई। उस समय युद्ध के हालातों को देखते हुए मंदिर के गोस्वामी राधारानी के श्रीविग्रह को श्योपुर ले गए। आठ माह तक श्योपुर में राधारानी के श्रीविग्रह की पूजा-अर्चना की गई। राधारानी मंदिर के रिसीवर डॉ. कृष्णमुरारी गोस्वामी ने बताया कि 1773 में भरतपुर रजवाड़े पर मुगल बादशाह शाह आलम ने अपने सेनापति नजफ खान को भेज कर कब्जा करने का प्रयास किया था।
राधाष्टमी: मुगल शासकों ने बरसाना के मंदिर पर किया था कब्जा, आठ माह तक श्योपुर में हुई थी राधारानी के श्रीविग्रह की पूजा
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संत श्रीकृष्णा मां संस्थापित श्रीराधा जन्मोत्सव समारोह का आयोजन मथुरा के गोविंदनगर में 13 सितंबर से 15 सितंबर तक होगा। श्रीराधा जन्मोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित मोहन शुक्ला शाम 5 बजे गणेश पूजन, कलश स्थापना के साथ करेंगे। उसके बाद अखंड हरिनाम कीर्तन आरंभ हो जाएगा। 14 सितंबर को प्रात: 5 बजे श्रीराधा का जन्म अभिषेक, दोपहर 12 बजे शृंगार और शाम 4 बजे राधारानी का चाव का डोला श्रीगल्तेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर कार्यक्रम स्थल 789 एफ सेक्टर राधाकुंज पहुंचेगा। उसके बाद बाल स्वरूप अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
राधाजी के जन्म की तैयारी में उमंग व उल्लास में डूबा राधाकुंड
श्रीराधाजी के जन्म की तैयारियों की उमंग व उल्लास में राधाकुंडवासी डूबे हुए हैं। 14 सितंबर को श्रीजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। सभी मंदिरों, आश्रमों व मठों को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। तलहटी के प्रमुख तीर्थस्थल राधाकुंड में युगल स्वरूप में वृषभानु दुलारी श्रीजी व श्रीकृष्ण विराजमान हैं। जल के रूप में राधारानी कुंड में श्रीजी विराजमान हैं। राधा-गोपीनाथ, राधा-गोविंद देव, राधा-कालाचांद, राधा-ब्रजबिहारी आदि मंदिरों में युगल स्वरूप में विराजमान हैं। यहां देश-विदेश से भक्त पहुंच रहे हैं। मंदिरों में तीन दिवसीय भजन संकीर्तन शुरू हो गया है। राधाजी के जन्म का अभिषेक प्रात: बेला के बाद होगा। महंत केशवदास ने बताया कि राधाकुंड तट स्थित घाट वाले मंदिर राधा-गोपीनाथ में राधा जी का जन्म अभिषेक 14 सितंबर को 11 बजे से होगा। मंदिरों में राधाजी के जन्म उत्सव के उपलक्ष्य में घंटे-घड़ियाल, झांझ-मजीरे की धुन बजाई जाएगी। राधाकुंड के सभी मंदिरों में तैयारी चल रही है।
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