'सब खुश थे। नाव में सभी कीर्तन कर आगे बढ़ रहे थे। अचानक बोट पुल की तरफ बढ़ने लगी तो हमने कई बार नाविक से कहा कि रुक जाओ। चार बार कहा पर वह नहीं माना और पलक झपकते ही नाव जा टकराई। हाहाकार मच गया।' यह कहते हुए तनिश फफक उठे। तनिश इसी नाव में सवार थे और उन्होंने इस घटना की पूरी कहानी बयां की।
घटना से लुधियाना निवासी तनिश बेहद व्यथित थे। उनकी आंखों के सामने ही पूरा हादसा हुआ था और उनकी भी जान जाते-जाते बची। अश्रुपूरित नेत्रों से उन्होंने पूरे हादसे के बारे में बताया। बोले..... 'सभी नाव में सवार होकर चले थे। खुश थे और संकीर्तन कर रहे थे। हवा तेज चल रही थी तो जैसे उन्हें यह आभास हो गया कि कुछ गड़बड़ी हो सकती है। नाव तेजी से पुल की तरफ चली तो उन्होंने नाविक को चेताया।
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मथुरा में हादसे में बचे तनिश ने सुनाई आपबीती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बीच में एक बार नाव लहराई। इस पर नाव सवार श्रद्धालु बोले कि ज्यादा लोग हैं। कम कर लीजिए। इससे पहले भी चार लोगों को दूसरी नाव में शिफ्ट किया जा चुका था पर नाविक नहीं माना। बोला, कोई नई बात नहीं हैं। चलते हैं और नाव आगे बढ़ाता गया, जैसे ही वह पुल के पास पहुंचा तो नाव के एंकर यानि लंगर में नाव टकराई और पलक झपकते ही क्रैश हो गई।'
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मथुरा में हादसे के बाद पांटुन पुल के पास तलाशी अभियान चलाते गोताखोर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बताते-बताते तनिश की आंखों से आंसू बह उठे। बोले, नाव के पलटते ही उसमें सवार लोग गिर गए। कुछ तब तक नाव में ही बचे थे जो चिल्लाए कि गोताखोर बुलाओ पर तत्काल कोई नहीं आया। नाविक न खुद कूदा और न ही किसी को पुकारा।
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मथुरा हादसे के बाद बचाव अभियान चलाते जवान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हमने अपने लोगों को खुद ही खींचने की कोशिश की। हाथ तक छिल गए पर इस दौरान पूरी नाव डूबने लगी। किसी तरह कूदे और कुछ तैरकर निकले। कुछ को बाकी गोताखोरों ने आकर बचाया पर यहां न एंबुलेंस आई और न ही अन्य कोई सुविधा।
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मथुरा हादसे के बाद मौके पर लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्रद्धालुओं में शामिल श्वेत जैन ने बताया कि यमुना में पीपों का पुल बनाया गया था। जलस्तर बढ़ने के बाद इन्हें खोल दिया गया। इसके बाद यह पुल यमुना में बहने लगे। इनसे टकराकर उनकी मोटरबोट पलट गई।