तीर्थनगरी वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में चल रहे मां गोदाम्माजी (माता लक्ष्मी का स्वरूप) के विवाहोत्सव के दूसरे दिन रविवार को उनकी सवारी पूरे विधि विधान से चांदी की पालकी पर विराजमान होकर निकाली गई। सुगंधित पुष्पों से बनी माला और आभूषण धारण किए श्रीगोदाजी का शृंगार मनमोहक था। उनके दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु अभिभूत हो गए।
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रंगनाथ मंदिर वृंदावन
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में श्रीगोदाजी का विवाह उत्सव भव्यता के साथ पांच दिनों तक मनाया जाता है। पांचवें दिन उनका विवाह श्रीकृष्ण रूपी भगवान रंगनाथ के साथ होता है। श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए श्रीगोदाजी एक महीने का धनुर्मास व्रत रखती हैं, जिसमें अपनी सब सखियों के साथ प्रण करती हैं कि वे सब सुबह स्नान करेंगी। दूध दही, घी का वर्जन करेंगी।
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पालकी पर विराजमान होकर निकलीं मां गोदम्माजी
- फोटो : अमर उजाला
एक माह के अंतिम पांच दिन प्रतिदिन वह श्रीवटपत्रशायी भगवान से प्रार्थना करती हैं कि हे मेघश्याम भगवान इस व्रत के फलस्वरूप जो विवाह की कामना मैंने की है उसे पूर्ण करें। श्रीगोदाजी के विवाह उत्सव में सैंकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
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मां गोदम्माजी का विग्रह (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण उनकी सारी इच्छाएं पूर्ण करते हैं और विवाह के मंगल सूचक पांचजन्य शंख, हल्दी, चंदन, पान सुपारी, माला, आभूषण इत्यादि भेंट करते हैं। सब मंगल सूचक संसाधनों को लेकर अम्माजी भगवान की स्तुति करती हुई परिक्रमा करती हैं और मंडप में उन पर हल्दी चढ़ाई जाती है। उनका अभिषेक होता है।
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रंगनाथ मंदिर, वृंदावन
- फोटो : अमर उजाला
पांचवें दिन माता गोदाम्माजी का विवाह धूमधाम के साथ माला बदली और वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि को साक्षी बनाकर सात फेरे लेकर श्रीकृष्ण स्वरूप रंगमन्नार के साथ होता है। इस वर्ष विवाह 13 जनवरी को शाम चार बजे से प्रारंभ होगा। रंगनाथ मंदिर में विवाहोत्सव की धूम है। देशभर में श्रद्धालु दर्शन को आ रहे हैं।